रेटिंग में सुधार, उच्च वृद्धि दर से साबित होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था ‘मृत’ नहीं: सीतारमण

नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को देश की 8.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि और रेटिंग में सुधार का हवाला देते हुए कहा कि अगर भारत एक ‘मृत अर्थव्यवस्था’ होता तो ऐसे संभव नहीं होता. लोकसभा में विपक्षी सदस्यों द्वारा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ कहने वाले बयान पर सरकार की प्रतिक्रिया मांगे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसने सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ”बाहरी कमजोरियों से बाहरी मजबूती” की ओर बढ़ी है.

सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा के जवाब में कहा, ”हर संस्था इस साल और आने वाले साल के लिए हमारी वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ा रही है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से भारत की वृद्धि को मान्यता देने की स्पष्ट बातें सामने आई हैं. कोई भी मृत अर्थव्यवस्था डीबीआरएस, एसएंडपी और आरएंडआई जैसी एजेंसियों से क्रेडिट रेटिंग में सुधार हासिल नहीं कर सकती.” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जुलाई में रूस से तेल खरीद जारी रखने को लेकर नयी दिल्ली के रुख पर निराशा जताते हुए भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ कहा था.

वित्त मंत्री ने वैश्विक एजेंसियों के आंकड़ों और रेटिंग सुधार का हवाला देते हुए इस टिप्पणी को खारिज किया. उन्होंने कहा, ”आज अर्थव्यवस्था कमजोरी से मजबूती की ओर बढ़ चुकी है.” सीतारमण ने विपक्षी सदस्यों से कहा, ”किसी के कुछ कह देने पर, चाहे वह व्यक्ति कितना ही महत्वपूर्ण क्यों न हो, हमें उसे आंख बंद करके मानना नहीं चाहिए. हमें देश के भीतर उपलब्ध आंकड़ों और बाहर से आने वाले आंकड़ों पर भरोसा करना चाहिए. आंकड़ों पर भरोसा कीजिए.” उन्होंने कहा, ”क्या कोई मृत अर्थव्यवस्था 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है? क्या किसी मृत अर्थव्यवस्था की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो सकता है?” भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया, जो पहले 6.8 प्रतिशत था. भारत ने सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत और जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा भारत के राष्ट्रीय खातों, जिनमें जीडीपी और सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के आंकड़े शामिल हैं, को ‘सी’ ग्रेड दिए जाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की समग्र रेटिंग मध्य स्तर की ‘बी’ ही बनी हुई है. उन्होंने कहा कि आईएमएफ ने आधार वर्ष पुराना होने की बात कही है और इसे संशोधित करने की जरूरत बताई है.

सीतारमण ने कहा, ”’यह कहना कि आईएमएफ ने भारत की रेटिंग घटाई है, सदन को गुमराह करना है. इस साल आईएमएफ ने समग्र सांख्यिकी के लिए भारत को ‘बी’ ग्रेड दिया है.” उन्होंने यह भी कहा कि महामारी के बावजूद भारत लगातार चौथे साल दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.

वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड के बाद भारत का कर्ज-जीडीपी अनुपात बढक़र 61.4 प्रतिशत हो गया था, लेकिन केंद्र सरकार इसे 2023-24 तक घटाकर 57.1 प्रतिशत पर लाने में कामयाब रही. उन्होंने कहा, ”मुझे उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा और घटकर 56.1 प्रतिशत रह जाएगा.” भाषा पाण्डेय रमण

अब वो हालत नहीं है कि रक्षा मंत्री को सदन में कहना पड़े कि पैसे नहीं हैं: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में ऐसी स्थिति नहीं है कि रक्षा मंत्री को सदन में कहना पड़े कि उनके पास नहीं हैं. सीतारमण ने सदन में, वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें-प्रथम बैच और संबंधित विनियोग (संख्याक 4) विधेयक, 2025 पर चर्चा का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की.

सीतारमण का इशारा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय रक्षा मंत्री रहे ए.के. एंटनी की ओर था, हालांकि उन्होंने उनका नाम नहीं लिया. वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 53 लाख करोड़ रुपये से अधिक रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित किए गए हैं.
उन्होंने दावा किया कि संप्रग शासन के दौरान तत्कालीन रक्षा मंत्री ने इन सदन में खड़े होकर कहा था कि मेरे पास पैसे नहीं है, लेकिन मोदी सरकार में ऐसी हालत नहीं है. इस पर कुछ विपक्षी सदस्यों ने उनसे इस बयान को सत्यापित करने की मांग की.

सीतारमण ने कहा कि वह अपनी बात सदन में मंगलवार को सत्यापित कर देंगी. हालांकि, बिरला ने नियम 352 का हवाला देते हुए कहा कि इसकी जरूरत नहीं है. इस दौरान, सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच हल्की नोकझोक भी हुई. सीतारमण ने कहा कि अनुदान की अनुपूरक मांगें किसी भी सरकार के लिए जरूरी होती हैं. उनका कहना था कि बतौर वित्त मंत्री उन्होंने अनुपूरक मांगों की संख्या में कमी की है.

सीतारमण ने कहा कि यूरिया और डीएपी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सावधानी से इनका प्रबंधन किया गया और वित्त मंत्रालय ने भारतीय किसानों को निराश नहीं किया है. उन्होंने सवाल किया कि क्या बिना पैसे के आईआईटी बन सकता है? वित्त मंत्री ने राजस्व की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इस सरकार के दौरान आईआईटी, एनआईटी और आईआईआईटी तथा आईआईएम की संख्या में बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने विपक्षी सदस्य दीपेंद्र हुड्डा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कहना उचित नहीं है कि शिक्षा पर पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है.

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