बंगाल में भाजपा सरकार: शुभेंदु अधिकारी के सामने 5 बड़ी चुनौतियां, इन्हें पूरा किया तो होगा असली ‘पोरिबर्तन’

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। वह राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में यह भव्य समारोह हुआ। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। भाजपा ने इस चुनाव में 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इसके साथ ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस का 15 साल पुराना शासन खत्म हो गया है। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान ‘पोरिबर्तन’ का नारा दिया था। अब शुभेंदु अधिकारी के कंधों पर इस वादे को सच करने की बड़ी जिम्मेदारी है।
1- बंगाल में अवैध घुसपैठ को रोकना
बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती अवैध घुसपैठ को रोकना है। पश्चिम बंगाल की सीमाएं बांग्लादेश से सटी हुई हैं। इस कारण राज्य में घुसपैठ एक गंभीर समस्या बनी हुई है। घुसपैठ पर लगाम लगाना राज्य और देश की सुरक्षा के लिए बहुत आवश्यक है। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। घुसपैठ की वजह से राज्य की सुरक्षा और संसाधनों पर हमेशा दबाव बना रहता है। शुभेंदु अधिकारी के लिए इस समस्या का समाधान करना एक बड़ी परीक्षा होगी। अब यह देखना होगा कि नई सरकार इस समस्या से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
2- गौ-तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाना
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ ही गौ-तस्करी का मुद्दा चर्चा में है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सामने इस अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करना एक बड़ी चुनौती है। राज्य के सीमावर्ती जिलों में गौ-तस्करी की समस्या वर्षों से बनी हुई है। तस्करों का जाल इतना गहरा है कि यह राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए है। सीमा से सटे इलाकों में तस्करी के कारण अक्सर हिंसा और तनाव की खबरें आती रहती हैं।
भाजपा ने अपने चुनावी वादों में इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा था। अब जनता की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार इस संगठित अपराध को कैसे रोकती है। तस्करी के इस नेटवर्क में कई अपराधी शामिल हैं, जो सुरक्षा घेरे को तोड़कर पशुओं को सीमा पार ले जाते हैं। यह समस्या केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य और देश की सुरक्षा से भी जुड़ी है। तस्करी के बढ़ते मामलों ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब देखना यह है कि शुभेंदु सरकार इस समस्या से कैसे पार पाती है और इस समस्या के लिए क्या उपाय करती है।
3- महिला सुरक्षा सुनिश्चित करना
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार के सामने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती है। राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को देखते हुए भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वॉड’ बनाने का वादा किया था। बता दें कि यह एक विशेष पुलिस दस्ता होगा जो केवल महिलाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित रहेगा।
इस दस्ते का मुख्य काम सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी रखना और संकट के समय महिलाओं की तुरंत मदद करना होगा। बंगाल में महिलाओं को भयमुक्त और सुरक्षित माहौल देना नई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि इस विशेष दस्ते के जरिए अपराधियों में डर पैदा किया जाए।
4- बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करना
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के बाद अब समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करना एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने है। भाजपा ने हमेशा से ही यूसीसी को अपने मुख्य एजेंडे में शामिल रखा है। बंगाल जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में इसे जमीन पर उतारना काफी जटिल काम होगा। क्योंकि यहां अलग-अलग समुदायों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं।
ऐसे में सभी के लिए एक समान कानून बनाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए शुभेंदु सरकार को कई कड़े और बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस दिशा में कदम कैसे आगे बढ़ाती है।
5- सिंडिकेट-कट मनी पर लगाम लगाना
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी और जटिल चुनौती ‘सिंडिकेट’ और ‘कट मनी’ की पुरानी समस्या को खत्म करना है। राज्य में लंबे समय से विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा, ‘कट मनी’ यानी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले होने वाली अवैध वसूली ने आम जनता को परेशान कर रखा है। गरीब लोगों तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद का एक हिस्सा बिचौलिए डकार जाते हैं। इस कमीशनखोरी के कारण राज्य में विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है और सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान होता है। भाजपा ने चुनाव के दौरान इस भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने का वादा किया था। शुभेंदु सरकार के लिए इस समस्या का समाधान करना एक बड़ी परीक्षा होगी। अब यह देखना होगा कि नई सरकार इस समस्या से कैसे पार पाती है।






