वित्त मंत्री निर्मला ने महिला-संचालित मूंगफली प्रसंस्करण इकाई का किया उद्घाटन

कर्नाटक: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यादगीर जिले में महिलाओं के नेतृत्व में संचालित नाबार्ड सर्मिथत मूंगफली प्रसंस्करण इकाई का बृहस्पतिवार उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि जिला हर वर्ष लगभग 22,500 टन मूंगफली का उत्पादन करता है और इसमें मूल्य संवर्धन की काफी संभावना है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”हमने अब एक ऐसी इकाई स्थापित की है जो मूंगफली को भून सकती है, तेल निकाल सकती है और पीनट बटर जैसे उत्पाद बना सकती है।” उन्होंने पेड्डापल्ली महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड की सराहना की, जो इस इकाई का संचालन कर रही है। मंत्री ने कहा कि कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में स्थापित ऐसी सात मूल्य संवर्धन इकाइयों में से यादगीर की इकाई अकेली है जिसे पूरी तरह महिलाएं चला रही हैं।

सीतारमण ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि इस इकाई का संचालन करने वाली महिलाओं को किसानों से सीधे मूंगफली खरीदने में कठिनाई हो रही है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं मंडियों एवं बाजारों से खरीद करने की कोशिश कर रही हैं और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने इसके लिए अलग से एक अधिकारी भी नियुक्त किया है। फिर भी ऐसा लगता है कि बीच में कोई बिचौलिया उन्हें सीधे खरीदने से रोक रहा है।

स्थानीय प्रशासन से जवाबदेही मांगते हुए उन्होंने पूछा कि कच्चा माल खरीदने में कठिनाई क्यों होनी चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा कि केवल एक इकाई से यादगीर के मूंगफली उत्पादन का पूरा उपयोग नहीं हो सकता तथा ऐसे कई और केंद्रों की आवश्यकता है। वित्त मंत्री ने स्थानीय प्रतिनिधियों, जिला अधिकारियों और कृषि सचिव से इस पहल पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया और कहा कि विकास केवल सरकारों से नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, ” यदि यादगीर को आगे बढ़ना है, तो केवल केंद्र और राज्य सरकारें ही नहीं बल्कि लोगों तथा स्थानीय प्रशासन को भी अधिक प्रयास करने होंगे।” वित्त मंत्री ने इकाई में बने उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच की भी मांग की और नाबार्ड से उत्पादक कंपनी को ई-कॉमर्स एवं क्विक-कॉमर्स मंच के माध्यम से विस्तार में मदद करने का अनुरोध किया।

आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध आम उत्पादक जिले से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि चित्तूर अपने आमों के लिए प्रसिद्ध है। ”मुझे उम्मीद है कि यादगीर अपनी मूंगफली के लिए प्रसिद्ध होगा।”उन्होंने कहा कि नाबार्ड सर्मिथत इस इकाई के सफल संचालन से जिले में निजी निवेश को भी बढ़ावा मिल सकता है।

जिले के लिए निरंतर समर्थन का आश्वासन देते हुए सीतारमण ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अभी काफी काम किया जाना बाकी है।
उन्होंने कहा कि यादगीर में महिला साक्षरता दर बहुत कम है। यह राज्य मानव विकास सूचकांक में सबसे नीचे है, बहुआयामी गरीबी अधिक है और प्रति व्यक्ति आय भी बहुत कम है जो ंिचता का विषय है।

मंत्री ने कहा कि यादगीर को केंद्र, राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से तुरंत और विशेष ध्यान की आवश्यकता है। सीतारमण ने कहा कि यादगीर और पड़ोसी रायचूर को ”आकांक्षी जिला” नामित किया गया है क्योंकि विकास के लाभ यहां अन्य क्षेत्रों की तुलना में समान रूप से नहीं पहुंचे हैं तथा सभी स्तरों की सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ” कर्नाटक के मानव विकास सूचकांक में यादगीर कहां है? यह देखकर मुझे दुख होता है। यह पहले, दूसरे, तीसरे या चौथे स्थान पर नहीं है। यह सबसे नीचे है। यादगीर कर्नाटक में अंतिम स्थान पर है। मैं यह गहरी पीड़ा के साथ कह रही हूं।” उन्होंने कहा कि यादगीर के लोगों की कोई गलती नहीं है और जिले की वर्तमान स्थिति इसलिए है क्योंकि विकास वर्षों तक वहां ठीक से नहीं पहुंच सका।

सीतारमण ने कहा कि देश भर में लड़कियां इंजीनियर, सिविल सेवक और वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी बन रही हैं, लेकिन यादगीर काफी पीछे है।
उन्होंने बताया कि यहां हर 100 में से केवल 41 महिलाएं ही साक्षर हैं या स्कूल/कॉलेज जा रही हैं। बुनियादी ढांचे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल हैं, लेकिन शिक्षक नहीं हैं, शौचालय नहीं हैं और कक्षाएं भी पर्याप्त नहीं हैं।

वित्त मंत्री ने जिले में गरीबी संकेतकों का भी उल्लेख किया और कहा कि देश में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। फिर भी यादगीर अब भी सबसे अधिक प्रभावित जिलों में है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु की प्रति व्यक्ति आय सबसे अधिक है जबकि यादगीर सबसे निचले स्तर पर है।
सीतारमण ने कहा कि यादगीर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है और लगभग 75 प्रतिशत भूमि खेती के अंतर्गत है।

उन्होंने बाडेपल्ली गांव में किसानों के प्रशिक्षण और साझा सुविधा केंद्र का भी उद्घाटन किया। सीतारमण के कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ” वित्त मंत्री द्वारा नाबार्ड के सहयोग से सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (एमपीएलएडी) योजना के तहत वित्तपोषित, यादगीर में किसानों का प्रशिक्षण एवं साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी) मूंगफली को उच्च मांग वाले कई मूल्य-र्विधत उत्पादों में प्रसंस्करण के लिए एक केंद्र के रूप में कार्य करता है।”



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