संसद में भारी हंगामे के आसार: चार बड़े बिल पेश करने की तैयारी में सरकार, क्या विपक्ष से बन पाएगी बात?


देश में मानसून सत्र के अंतिम दिनों में सरकार अपने विधायी एजेंडे को पूरा करने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष जवाबदेही के मुद्दों पर अड़ा है। सोमवार को संसद में तीखे टकराव और हंगामे की संभावना है।
संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सत्र समाप्त होने में अब केवल नौ कार्यदिवस बचे हैं। सरकार सोमवार को चार अहम विधेयकों को संसद में पेश करने की योजना बना रही है, जबकि विपक्ष राम मंदिर दान विवाद और दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति पर है।
आज के संसद के एजेंडे में क्या है?
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक: सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 37 करने का प्रस्ताव, ताकि लंबित मामलों में तेजी आए।
- एमएसएमई संशोधन विधेयक: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मजबूत बनाने और बकाया भुगतान में देरी रोकने के लिए संशोधन।
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) विधेयक: कोलकाता स्थित संस्थान को मजबूत बनाने का कानून।
- बैंकर बही साक्ष्य संशोधन विधेयक: डिजिटल बैंकिंग को देखते हुए पुराने कानूनों को अपडेट करने का प्रस्ताव।
संसदीय कार्य मंत्री का रवैया
किर्वेण रिजिजू ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि यदि हंगामा चलता रहेगा तो संसद का कामकाज प्रभावित होगा।
विपक्ष के प्रमुख मुद्दे
- राम मंदिर दान विवाद: कांग्रेस ने कहा है कि दान में गड़बड़ी की जांच होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार एसआईटी का गठन किया गया है।
- छात्र प्रदर्शन: 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विपक्ष ने विरोध किया है।
एफसीआरए संशोधन विधेयक
सरकार जल्द ही एफसीआरए संशोधन विधेयक भी ला सकती है, जिसमें संगठनों की संपत्तियों पर नियंत्रण का प्रावधान हो सकता है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की है।
पिछले सप्ताह पास हुए विधेयक
हंगामे के बीच “वंदे मातरम” को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण देने वाला विधेयक और जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पारित किए गए थे।






