मूवी रिव्यू – ‘धुरंधर: द रिवेंज’: रणवीर सिंह की दमदार अदाकारी, नोटबंदी और राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म

Ranveer singh dhurandhar the revenge movie review: फिल्म ‘धुरंधर 2’ 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। ‘धुरंधर 2’ रणवीर सिंह की फिल्म का सीक्वेल है, जो पहले भाग की भारी सफलता के बाद दर्शकों के बीच वापस आई है। इस बार कहानी सिर्फ गैंगवार और बदले की भावना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नोटबंदी, देश की राजनीतिक हलचल और बड़ी घटनाओं को भी समाहित किया गया है। उम्मीदें बहुत अधिक थीं, और फिल्म कुछ हिस्सों में उन्हें पूरा भी करती है, तो कहीं-कहीं थोड़ी कमी नजर आती है।
कहानी की शुरुआत जसकीरत सिंह रांगी के अतीत से होती है, जो अपने परिवार पर हुए अत्याचार के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखता है। जेल से छूटने के बाद वह भारत के लिए काम करने का संकल्प लेता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी के नाम से अंडरकवर मिशन पर उतरता है।
पहले भाग के बाद कहानी ल्यारी की सत्ता और गैंगवार के इर्द-गिर्द घूमती है। रहमान डकैत की मौत के बाद खाली हुई गद्दी पर कब्जा, दुश्मनों का सफाया और अपने असली मिशन की ओर बढ़ना, यही फिल्म का मूल केंद्रबिंदु है।
इस बार कहानी में नोटबंदी, अतीक अहमद जैसे मुद्दों का समावेश है, साथ ही देश-विदेश की राजनीतिक जटिलताओं को भी जोड़ा गया है। ‘बड़े साहब’ का रहस्य सबसे बड़ा आकर्षण है, जो पूरी कहानी का केंद्र बनता है। हालांकि इस रहस्य का इतना बड़ा खुलासा कहानी पर प्रभाव नहीं डालता। पहले भाग की तुलना में फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा और खिंचा हुआ लगता है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी मजबूत पकड़ बनाती है और अंत तक प्रभाव छोड़ती है।
रणवीर सिंह की अदाकारी इस फिल्म की जान है। उनके किरदार जसकीरत और हमजा दोनों में ही उन्होंने अलग-अलग तरह का आंतरिक संघर्ष और बॉडी लैंग्वेज दिखाया है। एक्शन, गुस्सा और इमोशंस हर फ्रंट पर रणवीर का जलवा कायम रहा है।
राकेश बेदी का प्रदर्शन इस बार भी सरप्राइज पैकेज साबित होता है। आर. माधवन का स्क्रीन उपस्थिति फिल्म को मजबूती देती है। संजय दत्त का योगदान अच्छा है, हालांकि सीमित है। अर्जुन रामपाल का किरदार इस बार उतना खतरनाक नहीं लग पाता।
सारा अर्जुन का स्क्रीन टाइम कम होने के बावजूद अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहती हैं। उनके किरदार में और अधिक गहराई की गुंजाइश थी।
डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष को आदित्य धर ने बेहतर बनाया है। रिसर्च और डीटेलिंग में खूब मेहनत नजर आती है, खासकर जब फिल्म असली घटनाओं को टच करती है। लेकिन यह भी सच है कि कई जगह यह कोशिश फिल्म को भारी और डॉक्यूमेंट्री जैसी बनाती है। पहले भाग की तेज़ कहानी यहां थोड़ी हल्की पड़ जाती है। कई दृश्य लंबे लगते हैं और कुछ ट्विस्ट का अनुमान पहले ही लगाया जा सकता है। हालांकि सेकंड हाफ में निर्देशन बेहतर हो जाता है और कहानी का प्रवाह मजबूत होता है। सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीक्वेंस काफी प्रभावशाली हैं। बैकग्राउंड स्कोर खासकर क्लाइमैक्स में बहुत अच्छा लगता है, लेकिन एडिटिंग की भी सुधार हो सकती थी।
फिल्म का म्यूजिक इस बार उतना प्रभावशाली नहीं है जितना पहले था। कुछ पुराने गाने का इस्तेमाल किया गया है, और ‘आरी आरी’ व ‘जान से गुजरते’ जैसे गीत ही याद रहते हैं। बैकग्राउंड स्कोर माहौल बनाने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, ‘धुरंधर 2’ एक महत्वाकांक्षी और बड़े पैमाने पर बनाई गई फिल्म है, जो एक्शन, राजनीति और रियल इवेंट्स को जोड़कर दर्शकों को अलग तरह का सिनेमाई अनुभव देने का प्रयास करती है। हालांकि इसकी लंबाई, धीमी गति वाली पटकथा और कुछ अधूरे किरदार इसे पहले भाग जितना प्रभावशाली नहीं बना पाते।
फिर भी, रणवीर सिंह की शानदार एक्टिंग, मजबूत सेकंड हाफ और प्रभावशाली क्लाइमैक्स इसे एक मनोरंजक थिएटर अनुभव बनाते हैं। यदि आपने पहले भाग को पसंद किया था, तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए, लेकिन उम्मीदें यथार्थ के साथ रखें।






