CM ममता का आरोप- मतदाता सूची-चुनाव रणनीति और डाटा उठा ले गई ईडी; भाजपा ने किया पलटवार

कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय की पश्चिम बंगाल में छह स्थानों पर छापेमारी जारी है। इनमें टीएमसी के आईटी सेल के कार्यालय पर भी छापेमारी हुई है। इसको लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि आईटी सेल के कार्यालय से मतदाताओं के आंकड़े और चुनाव की रणनीति व आंकड़ों को उठा लिया गया है। मुख्यमंत्री ने चार बजे राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का एलान किया है। वहीं, भाजपा ने भी बयान जारी कर मुख्यमंत्री पर पलटवार किया है।
दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों समेत अहम सबूत अपने साथ ले गईं मुख्यमंत्री: ईडी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रतीक जैन के आवास में दाखिल हुईं और भौतिक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों समेत अहम सबूत अपने साथ ले गईं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ पहुंचने तक कार्यवाही शांतिपूर्ण और पेशेवर ढंग से चल रही थी।
साक्ष्यों के आधार पर ली जा रही तलाशी: ईडी
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से भी बयान जारी किया गया है। ईडी ने कहा, तलाशी साक्ष्यों के आधार पर है और किसी भी राजनीतिक दल को लक्षित नहीं करती है। तलाशी 10 स्थानों (पश्चिम बंगाल में छह और दिल्ली में चार) पर की जा रही है। मामला अवैध कोयला तस्करी से जुड़ा है। इसका संबंध नकद लेन-देन, हवाला के जरिये पैसे के ट्रांसफर और ऐसे ही अन्य वित्तीय गतिविधियों से है। किसी भी पार्टी कार्यालय की तलाशी नहीं ली गई है। तलाशी किसी भी चुनाव से जुड़ी नहीं है और धनशोधन के खिलाफ नियमित कार्रवाई का हिस्सा है। स्थापित कानून सुरक्षा उपायों के अनुसार सख्ती से तलाशी की जा रही है।
शुभेंदु अधिकारी ने पूछा- आईपीएसी कार्यालय में मतदाता सूची क्यों?
ईडी की छापेमारी को लेकर लेकर पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा, आईपीएसी के पास मतदाता की सूची क्यों होगी? मैं ईडी की जांच पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसियों के काम में कई बार बाधा डाली है। क्या आईपीएसी कोई पार्टी कार्यालय है? आईपीएसी एक कॉर्पोरेट संस्था है, पार्टी कार्यालय नहीं। मैं ममता बनर्जी को चुनौती देता हूं कि वह कही भी छापेमारी करें। अगर उनके आवास पर छापेमारी की जाती है, तो कम से कम सौ करोड़ रुपये बरामद होंगे।
भाजपा ने जारी किया बयान
भारतीय जनता पार्टी ने प्रेस को जारी एक बयान एक्स पर भी साझा किया है। इसमें पार्टी ने कहा, पश्चिम बंगाल भाजपा ने ईडी की ओर से ली जा रही तलाशी के संबंध में मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए बयानों का संज्ञान लिया है। ईडी के अनुसार, ये तलाशी सबूतों के आधार पर है और कोयले की अवैध तस्करी के संबंध में की जा रही है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई के तहत किसी भी राजनीतिक दल के कार्यालय की तलाशी नहीं ली गई है। एजेंसी ने यह भी कहा है कि इस तलाशी का चुनाव से कोई संबंध नहीं है और यह धनशोधन के खिलाफ उसकी नियमित और निरंतर कार्रवाई का हिस्सा है।
इसमें आगे कहा गया, पश्चिम बंगाल भाजपा अपने उस दृढ़ रुख को दोहराती है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से, पेशेवर तरीके से और बिना किसी राजनीतिक दखल के काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए। कानून को केवल तथ्यों और सबूतों के आधार पर अपना रास्ता अपनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। कानूनी जांच प्रक्रियाओं का राजनीतिकरण करने या सांविधानिक अधिकारों को कमजोर करने का कोई भी प्रयास केवल संस्थानों और कानून के शासन में जनता के विश्वास को कमजोर करता है।
‘मतदाता सूची से हटाए गए डेढ़ करोड़ से ज्यादा नाम: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा, भाजपा लोकतंत्र की हत्यारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से डेढ़ करोड़ से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अमर्त्य सेन, कवि जय गोस्वामी और अभिनेता देव को भी नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं और युवाओं के नाम भी मतदाता सूची से हटाए गए हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि एक हत्यारे को भी अपनी बात रखने का मौका मिलता है, लेकिन असली मतदाता को नहीं। उन्होंने खास तौर पर उन महिलाओं का जिक्र किया जिनकी हाल ही में शादी हुई है और जिनके उपनाम बदल गए हैं या जिनका पता बदला है, उनके नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
‘एसआईआर की वजह हुईं 72 से अधिक मौतें: ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वजह से 72 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ ने आत्महत्या भी की है। उन्होंने पूछा कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब आईपीएसी कार्यालय पर छापा मारा जा सकता है, तो अगर वह भाजपा के आईटी कार्यालय पर छापा मारें तो क्या वह सही होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सारी हदें पार कर दी गई हैं और उनकी पार्टी के आईटी कार्यालय से एसआईआर का डाटा, पार्टी की नीतियों का डाटा, उम्मीदवारों की सूची, बूथ अध्यक्षों की सूची और भविष्य की रणनीति उठा ली गई है।
उन्होंने कहा कि आईपीएसी कोई निजी संस्था नहीं है, बल्कि एआईटीसी द्वारा अधिकृत है और समझौते के तहत पार्टी के लिए काम करती है। ममता बनर्जी ने पूछा कि किसी भी समय किसी आईटी सेल से डाटा एकत्र करना क्या अपराध नहीं है और क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं है। उन्होंने कहा कि वह वहीं इंतजार करेंगी, जब तक आईपीएसी प्रमुख प्रतीक जैन आकर इस पूरे मामले को सुलझा नहीं देते।





