ईडी ने आंध्र प्रदेश शराब ‘घोटाले’ की जांच के सिलसिले में वाईएसआरसीपी सांसद मिधुन रेड्डी को तलब किया

हैदराबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद पी वी मिधुन रेड्डी को आंध्र प्रदेश में 3,500 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। ऐसा आरोप है कि यह घोटाला राज्य में पूर्ववर्ती वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की सरकार के दौरान हुआ था।

अधिकारियों ने बताया कि राजमपेट से वाईएसआरसीपी के 48 वर्षीय सांसद को 23 जनवरी को यहां ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। उनका बयान धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत दर्ज किया जाएगा। मामले की जांच कर रही आंध्र प्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जुलाई 2025 में उन्हें आरोपी के रूप में नामित कर गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं।

उन्होंने बताया कि एजेंसी ने पूर्व सांसद विजयसाई रेड्डी को भी 22 जनवरी को पेश होने के लिए तलब किया है ताकि उनसे आंध्र प्रदेश में 2019 से 2024 के बीच लागू की गई शराब नीति के क्रियान्वयन के बारे में पूछताछ की जा सके। आंध्र प्रदेश एसआईटी द्वारा दर्ज प्राथमिकी में विजयसाई रेड्डी को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि व्यापार से प्राप्त अवैध धनराशि उनके माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी नेता वाई एस जगन मोहन रेड्डी को हस्तांतरित की गई थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि यह मामला ”राजनीतिक साजिश” का नतीजा है। संघीय जांच एजेंसी ने एसआईटी की शिकायत का संज्ञान लेते हुए कथित घोटाले की जांच के लिए सितंबर 2025 में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने अब तक इस मामले में तीन आरोपपत्र दाखिल किए हैं। एसआईटी ने आरोपपत्रों में कहा है कि जगन मोहन रेड्डी उन लोगों में से एक थे जिन्हें हर महीने औसतन 50 करोड़ से 60 करोड़ रुपये की रिश्वत मिलती थी।

हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री को उक्त अभियोगों में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया है। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि जगन मोहन रेड्डी ने जुलाई 2019 में नई शराब नीति से संबंधित एक बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसके तहत शराब बेचने वाले आउटलेट ‘आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (एपीएसबीसीएल) द्वारा संचालित किए जाएंगे, जो एक सरकारी संस्था है।

आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि रिश्वत की रकम को ‘आॅफिस ब्वॉय’ या कर्मचारियों जैसे निचले स्तर के व्यक्तियों के माध्यम से व्यवस्थित रूप से धन शोधन के जरिए ठिकाने लगाया गया था। वाईएसआरसीपी ने कहा है कि आरोपपत्रों में लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।

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