सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब अमेरिका का नया 10% टैरिफ, भारत के व्यापार पर क्या होगा असर? समझिए

नई दिल्ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक टैरिफ को खारिज किए जाने के बाद, अमेरिका ने व्यापार नियमों में बड़ा बदलाव किया है। व्हाइट हाउस ने 20 फरवरी को एक नई घोषणा जारी की है, जिसके तहत दुनिया भर से आयात होने वाले सामानों पर नया शुल्क लगाया गया है। एक बिजनेस जर्नलिस्ट के तौर पर आइए सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि ये नए नियम क्या हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था व कंपनियों के लिए इसके क्या मायने हैं।

सवाल 1: ट्रंप प्रशासन का नया टैरिफ नियम क्या है और यह कब से लागू होगा?

जवाब: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने 20 फरवरी को एक नई घोषणा जारी की है। इसके तहत अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात सरचार्ज लगाया गया है। यह नया नियम 24 फरवरी, 2026 से प्रभावी हो जाएगा। यह 10 प्रतिशत का सरचार्ज मौजूदा एमएफएन शुल्क के ऊपर से लगाया जाएगा।

सवाल 2: भारत पर इस नए 10% टैरिफ का क्या असर होगा?

जवाब:भारत के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि अब भारतीय सामानों पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ (RT) 25 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा।
पहले अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और रूसी कच्चा तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाकर इसे 50 प्रतिशत कर दिया था।
7 फरवरी से 24 फरवरी, 2026 के बीच रूसी तेल वाला जुर्माना हटा लिया गया था, जिससे शुल्क वापस 25 प्रतिशत हो गया था।
दोनों देशों के बीच इसे 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव था, लेकिन अब 24 फरवरी से भारत को केवल 10 प्रतिशत का नया सरचार्ज देना होगा।

सवाल 3: क्या कुछ सामानों को इस नए आयात शुल्क से छूट दी गई है?

जवाब: जी हां, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्हाइट हाउस ने कई वस्तुओं को इस अस्थायी आयात शुल्क से बाहर रखा है। छूट पाने वाले सामानों में क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा उत्पाद, फार्मास्युटिकल्स व दवा सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्री वाहन और बीफ, टमाटर व संतरे जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, भारत पर लगने वाले क्षेत्रीय टैरिफ जैसे स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर 50 प्रतिशत तथा कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25 प्रतिशत का शुल्क जारी रहेगा।

सवाल 4: अमेरिका ने ये टैरिफ क्यों लगाए थे और भारत के साथ व्यापारिक आंकड़े क्या कहते हैं?

जवाब: अमेरिका का आरोप है कि भारत अमेरिकी सामानों पर भारी टैरिफ लगाता है, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान होता है और अमेरिका को भारत के साथ एक बड़े व्यापार घाटे का सामना करना पड़ता है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि 2021-25 के दौरान अमेरिका माल के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है। 2024-25 में दोनों देशों के बीच 186 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जिसमें भारत ने अमेरिका के साथ 41 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया। सेवाओं को मिलाकर भारत का कुल व्यापार अधिशेष 44.4 बिलियन डॉलर रहा है।

सवाल 5: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का आगे क्या भविष्य है?

जवाब: ट्रंप का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय टीम 23 फरवरी, 2026 से वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक करने वाली है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, अगले महीने इस समझौते पर हस्ताक्षर होने और अप्रैल में इसके चालू होने की उम्मीद है। लेकिन, थिंक टैंक जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का मानना है कि चूंकि अब अमेरिका ने सभी देशों के लिए टैरिफ घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है, इसलिए भारत को इस समझौते से होने वाले फायदों का दोबारा मूल्यांकन करना चाहिए।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 25 प्रतिशत से 10 प्रतिशत पर आया टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए फौरी तौर पर लाभदायक है। हालांकि, स्टील और ऑटो जैसे सेक्टरों पर पुराने भारी शुल्क का बने रहना और 150 दिनों की अस्थायी अवधि के बाद की अनिश्चितता भारत के लिए चुनौती बनी हुई है। आगामी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बैठकों से ही यह स्पष्ट होगा कि भविष्य में दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते किस करवट बैठेंगे।



Show More

akhbarilal

Akhbaarilal is daily hindi news portal of Chhattisgarh. Get breaking and latest news from Indian including all states. Find latest news from Raipur. Read CG DPR News on www.akhbaarilal.in.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button