आईजीएमसी में हाथापाई: आरोपी डॉक्टर और मरीज ने एक-दूसरे से माफी मांगी

शिमला. इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में एक डॉक्टर और मरीज के बीच ‘तू’ कहकर संबोधित किए जाने को लेकर हुई हाथापाई की घटना के लगभग एक हफ्ते बाद दोनों पक्षों ने मंगलवार को एक-दूसरे से माफी मांग ली. उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाते हुए कहा कि वे इस मामले को भुलाकर आगे बढ़ रहे हैं.

आईजीएमसी में मरीज अर्जुन सिंह से हाथापाई के आरोपी डॉ. राघव नरूला ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “दोनों पक्षों से गलती हुई, लेकिन अब समझौता हो गया है, सभी गिले-शिकवे दूर कर लिए गए हैं और सबकुछ ठीक है. हम दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया, माफी मांगी और मामले को भुलाकर आगे बढ़ने का फैसला किया.” अर्जुन ने भी पुष्टि की कि मामला सुलझ गया है.

उसने कहा, “डॉक्टर ने माफी मांग ली है और दोनों पक्षों की शिकायतें दूर हो गई हैं. उस समय क्या हुआ था और कैसे हुआ था, इस बारे में अब और कुछ कहने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मामला खत्म हो चुका है.” डॉ. राघव और अर्जुन ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान की मौजूदगी में अपने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया. चौहान ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि किसी को कोई परेशानी हो. उन्होंने बताया कि जनता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने पहले डॉक्टरों से मुलाकात की और उन्हें जांच का आश्वासन दिया.

चौहान के मुताबिक, घटना के सिलसिले में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद डॉ. राघव के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी भी वापस ले ली जाएगी. डॉ. राघव और अर्जुन, दोनों के परिजनों इस घटनाक्रम पर खुशी जाहिर की. परिजनों ने कहा कि गलती चाहे जिसकी भी रही हो, मामले में अब समझौता हो गया है. उन्होंने कहा कि घटना से सबक लेना जरूरी है, ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकी जा सके. आईजीएमसी में डॉ. राघव और अर्जुन के बीच हाथापाई की घटना 22 दिसंबर को हुई थी.

अर्जुन ने दावा किया था कि उसने डॉ. राघव के खुद को ‘तुम’ की जगह ‘तू’ कहकर संबोधित करने पर आपत्ति जताई थी, जिससे वह भड़क उठे और उसे मुक्का जड़ दिया. हालांकि, डॉ. राघव का आरोप था कि अर्जुन ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करके झगड़ा भड़काया था.

घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें डॉ. राघव को अर्जुन को मुक्का जड़ते और अर्जुन को डॉ. राघव को लात मारते देखा गया था. घटना की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक समिति गठित की थी, जिसने दोनों पक्षों की गलती पाई.
समिति ने डॉ. राघव को “कदाचार, दुर्व्यवहार और लोक सेवक के लिए अशोभनीय आचरण” का दोषी पाया था, जिसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था.

डॉ. राघव की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर आईजीएमसी के रेजिडेंट डॉक्टर पिछले शुक्रवार को हड़ताल पर चले गए थे. उन्होंने मुख्यमंत्री की अपील और घटना की पुन: जांच के आश्वासन के बाद रविवार को हड़ताल समाप्त कर दी. सुक्खू ने सोमवार शाम स्वास्थ्य अधिकारियों को घटना की पुन: जांच करने के लिए एक नयी समिति गठित करने का निर्देश दिया.

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