जन भागीदारी ही जन-केंद्रित सुरक्षा की आधारशिला है: राष्ट्रपति मुर्मू

नयी दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि सामुदायिक भागीदारी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती है और लोगों को अपने आसपास होने वाली घटनाओं से बेपरवाह नहीं बने रहना चाहिए क्योंकि जन भागीदारी ही जन-केंद्रित सुरक्षा की आधारशिला है। खुफिया ब्यूरो (आईबी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुर्मू ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया ने सूचना और संचार की दुनिया को बदल दिया है तथा इसमें सृजन और विनाश दोनों की क्षमता है।

मुर्मू ने कहा, ‘‘लोगों को गलत सूचनाओं से बचाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस कार्य को निरंतर और अत्यंत प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय हित में तथ्यों पर आधारित जानकारी को लगातार प्रस्तुत करने वाले सक्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का एक समुदाय बनाने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें जागरूक नागरिकों ने सुरक्षा संकटों को टालने में पेशेवर बलों की मदद की है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘लोगों को अपने आसपास घटित होने वाली घटनाओं से बेपरवाह नहीं बने रहना चाहिए। उन्हें अपने परिवेश और उससे परे के क्षेत्रों की सुरक्षा में सचेत और सक्रिय भागीदार बनना चाहिए। जन भागीदारी ही जन-केंद्रित सुरक्षा की आधारशिला है।’’

मुर्मू ने कहा कि स्वतंत्रता-पूर्व काल से चले आ रहे विरासत के बोझ के कारण, कुछ लोग आम तौर पर सरकारी कर्मचारियों और विशेष रूप से पुलिस बलों के प्रति दूरी की भावना महसूस कर सकते हैं।उन्होंने कहा, ‘‘विकसित समाजों और देशों में, लोग आम तौर पर पुलिसर्किमयों को एक मित्रवत व्यक्ति के रूप में देखते हैं जिन पर मदद के लिए भरोसा किया जा सकता है।

हमारी नागरिक पुलिस और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को जनता की सेवा की भावना के साथ काम करना होगा।’’ राष्ट्रपति ने ‘जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा : विकसित भारत के निर्माण में सामुदायिक भागीदारी’ विषय पर आयोजित व्याख्यान को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार, केंद्रीय गृह सचिव गोंिवद मोहन और आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

देश द्वारा जन भागीदारी के माध्यम से मादक पदार्थों के खतरे के खिलाफ एक प्रभावी अभियान शुरू किए जाने का जिक्र करते हुए मुर्मू ने कहा कि कट्टरवाद की समस्या से निपटने के लिए भी इसी तरह के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे जटिल चुनौतियां गैर-पारंपरिक और डिजिटल प्रकृति की हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर समस्याएं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न होती हैं। इस संदर्भ में, तकनीकी रूप से सक्षम समुदायों को विकसित करने की आवश्यकता है। डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती समस्या के लिए घरेलू, संस्थागत और सामुदायिक स्तर पर सतर्कता आवश्यक है।’’ मुर्मू ने कहा कि डिजिटल मंच नागरिकों को साइबर जालसाजी, डिजिटल धोखाधड़ी और आॅनलाइन दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने के लिए सशक्त बना सकते हैं।

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