प्रसिद्ध गायक अनूप जलोटा को दक्षिण अफ्रीका में मिली मानद सदस्यता

जोहानिसबर्ग: भारत के लोकप्रिय गायक अनूप जलोटा को दक्षिण अफ्रीका में भारतीय प्रवासियों द्वारा भारत की संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए स्थापित उत्तर प्रदेश देवभूमि संगठन (यूपीडेस) की मानद सदस्यता सोमवार को प्रदान की गई। जलोटा ने सप्ताहांत में डर्बन और जोहानिसबर्ग में दो संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने वहां के भारतीय मूल के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पांच पीढि़यों से अपनी संस्कृति को जीवित रखा है।

अमेरिका में संगीत कार्यक्रम की यात्रा पर रवाना होने से पहले ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में जलोटा ने याद किया कि वह और भारत के कई अन्य प्रमुख कलाकार दशकों तक दक्षिण अफ्रीका में अपने प्रशंसकों के लिए कार्यक्रम करना चाहते थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में 1948 से रंगभेद के खिलाफ वैश्विक मुहिम का नेतृत्व कर रही भारत सरकार के कड़े रुख के कारण उन्हें वहां कार्यक्रम प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं मिल सकी।

उन्होंने कहा, ”हम दक्षिण अफ्रीका जाकर कार्यक्रम करने के लिए बेहद उत्सुक थे, लेकिन हमें अनुमति नहीं मिली। हम बस दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर पूरी दुनिया की यात्रा करते थे। हमने भारत सरकार से कई बार अनुरोध किया, लेकिन हर बार जवाब यही मिला कि संबंध ठीक नहीं हैं, इसलिए वहां मत जाओ।”

जलोटा ने बिना नाम लिए दावा किया कि कुछ भारतीय कलाकारों ने नियमों की अनदेखी कर दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की थी। नेल्सन मंडेला की 27 साल की राजनीतिक कैद के बाद रिहाई होने पर भारत ने अपना रुख बदला और जलोटा उन पहले भारतीय कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने मंडेला के राष्ट्रपति बनने से ठीक पहले दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की।

जलोटा ने कहा कि तब से वह दक्षिण अफ्रीका में कई बार कार्यक्रम कर चुके हैं और हर बार दर्शकों ने उनके भजनों और गजलों को बड़े उत्साह से सराहा है। उन्होंने कहा, ”दक्षिण अफ्रीका हमारा छोटा भारत है। पांच पीढि़यां बीत जाने के बाद भी यहां के लोगों ने अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। वे अब भी रामायण का पाठ करते हैं, हनुमान चालीसा के कार्यक्रम आयोजित करते हैं और ंिहदू विष्णु परिषद भी सक्रिय है। यह देखना बेहद प्रभावशाली है कि इन्होंने अपनी संस्कृति और कला को कैसे जीवित रखा है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भाषा के क्षेत्र में अभी और काम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ”मेरा मानना है कि ंिहदी सिखाने के लिए विद्यालय पहले से खुल रहे हैं। अगर ये लोग ंिहदी में बात कर सकें, तो संस्कृति का प्रसार और तेजी से होगा। मुझे उम्मीद है कि ऐसा जरूर होगा।” जलोटा ने संगठन के संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष शर्मा की भी प्रशंसा की, जिन्होंने उनकी मेजबानी की और उन्हें मानद सदस्यता प्रदान की।

उन्होंने कहा, ”मैं स्वयं उत्तर प्रदेश से हूं और इस संगठन का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।” शर्मा ने कहा कि ‘यूपीडेस’ अविभाजित उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का काम करता है, जो अब उत्तराखंड के नाम से जाने जाते हैं।

उन्होंने कहा, ”उत्तराखंड की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने के लिए अनूप जी से बेहतर कोई नहीं हो सकता, क्योंकि वह भजन सम्राट हैं। वे हमें हमारी संस्कृति से जोड़े रखते हैं और हमारे उद्देश्यों को पूरा करने में सच्चे सहायक हैं।” जलोटा ने सोमवार को अपने सम्मान में आयोजित एक स्वागत समारोह में भारतीय मूल के कुछ युवा दक्षिण अफ्रीकी गायकों की भी सराहना की, जिन्होंने उनके र्चिचत गीत प्रस्तुत किए।



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