बंगाल में UCC पर बनेगा नया रास्ता?: विधानसभा में आज पेश होंगे ये चार विधेयक, गुंडागर्दी-उगाही पर सरकार सख्त

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार का दिन राजनीतिक और विधायी लिहाज से बेहद अहम रहने वाला है। राज्य सरकार विधानसभा में चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जिनमें गुंडागर्दी और उगाही पर रोक लगाने से जुड़े दो नए कानून सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। दूसरी ओर, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। हालांकि, सरकार फिलहाल यूसीसी विधेयक लाने के बजाय पहले एक विशेषज्ञ समिति बनाकर उसका मसौदा तैयार कराने की तैयारी में है।

विधानसभा में पेश किए जाने वाले चार विधेयकों में पश्चिम बंगाल उगाही (तोलाबाजी) निषेध विधेयक, पश्चिम बंगाल गुंडा दमन विधेयक, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण संशोधन विधेयक शामिल हैं। राज्य सरकार का कहना है कि बदलते अपराध स्वरूप और संगठित अपराध से निपटने के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे को और मजबूत बनाने की जरूरत है। माना जा रहा है कि इन विधेयकों पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो सकती है।

क्या गुंडागर्दी और उगाही पर लगाम लगाने की तैयारी है?
राज्य सरकार उगाही और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में सख्त कानूनी प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित पश्चिम बंगाल उगाही (तोलाबाजी) निषेध विधेयक और पश्चिम बंगाल गुंडा दमन विधेयक का मकसद राज्य में जबरन वसूली, धमकी और संगठित अपराध पर अंकुश लगाना है। सरकार का दावा है कि इन कानूनों से अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकेगा। हालांकि, इन विधेयकों के विस्तृत प्रावधान सदन में पेश होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

क्या ओबीसी और पिछड़ा वर्ग से जुड़े कानूनों में भी बदलाव होगा?
सरकार विधानसभा में पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक और ओबीसी आरक्षण संशोधन विधेयक भी पेश करेगी। इन विधेयकों का उद्देश्य राज्य में पिछड़े वर्गों से जुड़ी संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था को नए कानूनी ढांचे के अनुरूप मजबूत करना बताया जा रहा है। हाल के महीनों में ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कई घटनाक्रम हुए हैं। ऐसे में इन विधेयकों पर सभी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।

क्या यूसीसी पर फिलहाल पीछे हटी राज्य सरकार?
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार समान नागरिक संहिता को लेकर जल्दबाजी के मूड में नहीं है। पहले ऐसी अटकलें थीं कि यूसीसी विधेयक इसी सत्र में पेश किया जा सकता है, लेकिन अब सरकार ने पहले एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया है। यह समिति राज्य की सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी परिस्थितियों का अध्ययन करेगी और सुझाव देगी कि पश्चिम बंगाल में यूसीसी किस स्वरूप में लागू की जा सकती है।

क्या पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी?
सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी जा सकती है। वह उत्तराखंड में यूसीसी का मसौदा तैयार करने वाली समिति की भी अध्यक्ष रह चुकी हैं। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार और उनके बीच प्रारंभिक स्तर पर बातचीत हो चुकी है। सरकार की योजना समिति में विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों और विपक्षी दलों के सदस्यों को भी शामिल करने की है, ताकि व्यापक परामर्श के बाद एक स्वीकार्य मसौदा तैयार किया जा सके।



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