खामेनेई का अंतिम संस्कार: भारत से विदेश राज्यमंत्री जा सकते हैं, क्या बिहार के गवर्नर भी शिष्टमंडल का हिस्सा?


नई दिल्ली: अमेरिका से जंग के बीच जान गंवाने वाले ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को अंतिम विदाई दी जानी है। जुलाई में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार प्रस्तावित है। शोक के इस क्षण में ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया है। अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि देश की तरफ से विदेश राज्यमंत्री इस कार्यक्रम में जाएंगे। बिहार के राज्यपाल भी इस समारोह में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरानी सूत्रों के हवाले से मीडिय एजेंसी एएनआई ने बताया कि बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस कदम को भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और ऐतिहासिक संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयातुल्ला खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी अपने व्यस्त विदेश कार्यक्रमों के चलते ईरान नहीं जा पाएंगे। ऐसे में भारत सरकार ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। अंतिम संस्कार समारोह चार जुलाई से शुरू होगा और नौ जुलाई तक ईरान के कई शहरों में आयोजित किया जाएगा। खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
क्या होगा अंतिम संस्कार का पूरा कार्यक्रम?
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, चार और पांच जुलाई को अयातुल्ला खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला परिसर में आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद छह जुलाई को राजकीय अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। ईरान सरकार ने शोक अवधि के दौरान तेहरान प्रांत में सार्वजनिक अवकाश की भी घोषणा की है। अंतिम संस्कार समारोह का समापन नौ जुलाई को मशहद में दफनाने के साथ होगा। माना जा रहा है कि इस दौरान लाखों लोग खामेनेई को अंतिम विदाई देने पहुंच सकते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रतिनिधिमंडल?
भारत और ईरान के बीच दशकों पुराने सभ्यतागत, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापार जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लगातार सहयोग बढ़ा है। ऐसे में अंतिम संस्कार में भारत का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजना इस रिश्ते की अहमियत को दर्शाता है।
क्या हाल के महीनों में भारत-ईरान संबंध और मजबूत हुए?
हाल के महीनों में भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क लगातार जारी रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में भारत का दौरा किया था और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। खामेनेई की मौत के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर भी किए थे। इसके अलावा पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के दौरान भी दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क बना रहा।
क्या पहले भी भारत ने ऐसे मौकों पर उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व किया?
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने ईरान के किसी शीर्ष नेता के निधन पर उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा हो। वर्ष 2024 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के निधन पर तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भारत का प्रतिनिधित्व करने ईरान गए थे। इस बार भी भारत ने समान कूटनीतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ नेताओं को अंतिम संस्कार में भेजने का फैसला किया है।






