अमित शाह की जनसांख्यिकीय बदलाव संबंधी टिप्पणी सीएए, एनआरसी को उचित ठहराने की कोशिश: विजयन


तिरुवनंतपुरम: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन ने शनिवार को आरोप लगाया कि सीमावर्ती राज्यों में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर की गई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी का उद्देश्य नफरत फैलाना और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) एवं प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को लागू करने को उचित ठहराना है।
केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजयन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों के हाल में आयोजित सम्मेलन में दिए गए शाह के बयान को जनसांख्यिकीय बदलाव पर केंद्र द्वारा एक समिति गठित किए जाने की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। विजयन ने आरोप लगाया कि यह समिति असम, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे सीमावर्ती राज्यों में रहने वाले लोगों को बांटने और अलग-थलग करने की संघ परिवार की ”सुनियोजित कोशिश” का हिस्सा है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि सीमावर्ती राज्यों में ”असामान्य जनसंख्या वृद्धि” हो रही है ताकि सीएए एवं प्रस्तावित एनआरसी जैसे ”विभाजनकारी कदमों” को उचित ठहराया जा सके। विजयन के अनुसार, घुसपैठ का मुद्दा जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है ताकि संघ परिवार के हित साधे जा सकें और यह दावा करके एक विशेष समुदाय को संदेह के घेरे में लाया जा सके कि सीमावर्ती जिलों की जनसांख्यिकीय संरचना बदल रही है।
विजयन ने सीएए का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जिस तरह नागरिकता कानून के जरिए मुस्लिम अल्पसंख्यकों को बाहर रखने की कोशिश की गई, केंद्रीय गृह मंत्रालय जनसांख्यिकीय बदलाव संबंधी समिति के माध्यम से भी उसी उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने समाज के धर्मनिरपेक्ष वर्गों से देश में ”विभाजन पैदा करने की कोशिशों” के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।
शाह ने बृहस्पतिवार को कहा था कि केंद्र सरकार घुसपैठ जैसी असामान्य वजहों से जनसांख्यिकी में होने वाली वृद्धि पर कड़े और सख्त रवैये के साथ रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए चार-स्तरीय सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है। शाह ने सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा था कि आने वाले समय में केंद्र सरकार समुद्री और तटीय सीमा सुरक्षा को भी समग्र दृष्टिकोण के साथ मजबूत करेगी।






