एजुकेशन फॉर भारत महाकुंभ: वीरेंद्र सहवाग ने दिया शिक्षा का अहम मंत्र, बोले- पिता का सपना पूरा कर रहा

नई दिल्ली: एजुकेशन फॉर भारत कॉन्क्लेव का शनिवार को सुबह 11 बजे शुभारंभ हुआ। इसके तीसरे सत्र में दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने शिक्षा जगत से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और बताया कि बच्चों में कौशल विकसित करना बेहद जरूरी है।

पहला सत्र- ब्रिजिंग द डिजिटल गैप: भारत-फर्स्ट एडटेक मॉडल्स पर चर्चा

इसके पहले सत्र में डिजिटल गैप और एडटेक मॉडल पर गंभीर चर्चा हुई। चर्चा के लिए Uolo के सीईओ पल्लव पांडेय, डीपीएस (मथुरा रोड) के प्रिंसिपल और रायन इंटरनेशनल की प्रिंसिपल सुधा सिंह शामिल हुईं। सभी वक्ताओं ने इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए।

रायन इंटरनेशनल की प्रिंसिपल सुधा सिंह ने कहा, “भारत के लिए हम शिक्षा के क्षेत्र में इफार्ट करते रहेंगे और आगे बढ़ेंगे। देश में कई सारे चेंज आए हैं। हम काफी आगे बढ़ चुके हैं। बहुत कुछ अचीव करना है और हम बहुत कुछ अचीव कर चुके हैं। तकनीक के साथ हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं।”

डीपीएस मथुरा रोड के प्रिंसिपल डॉ. राम सिंह ने सत्र के दौरान कहा, “तकनीक एकमात्र समाधान है जिससे हम बहुत ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। जहां दिक्कत है वहां अगर हम तकनीक पहुंचा सकें तो टीचिंग और लर्निंग बहुत प्रभावी होगी। इसके लिए पब्लिक और प्राइवेट पार्टनरशिप की जरूरत है। इसके लिए हमें रेडिनेस का माहौल बनाना होगा।”

दूसरा सत्र- शिक्षा क्षेत्र का बदलता परिदृश्य

दूसरे सत्र में जम्मू यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. उमेश राय ने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि जम्मू यूनिवर्सिटी डिजाइन योर डिग्री कोर्स शुरू करने वाला पहला विश्वविद्यालय है। इसमें किसी भी विषय का छात्र में भाग ले सकता है। इसमें किसी के लिए कोई रोक नहीं है इस कोर्स की खास बात यह है कि इसमें छात्रों का पैशन ही उनकी डिग्री तय करेगा। उन्होंने कहा, “पूरा सिस्टम इसे सफल बनाने के लिए काम कर रहा है। जम्मू कश्मीर पूरे देश को शिक्षा के मामले रोशनी दिखा रहा है।”

तीसरा सत्र- सहवाग ने बताया शिक्षा जगत से जुड़ा अनुभव

तीसरे सत्र में दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग कॉन्क्लेव में चर्चा में जुड़े। क्रिकेट के मैदान से क्लासरूम तक: अनुशासन, लचीलापन और हाई-परफॉर्मेंस लर्नर्स तैयार करने के विषय से जुड़े इस सत्र में सहवाग ने कहा, “बच्चा रह सके, पढ़ सके और खेल सके ऐसा पिता का सपना था। अब वो सपना पूरा हो सका है। विश्व कप जीतने के बाद सहवाग इंटरनेशनल स्कूल शुरू हुआ। कई बच्चों ने नाम किया है। मनु भाकर भी हमारे स्कूल से हैं। मैं अपने पिता का सपना पूरा कर रहा हूं। जरूरतमंद बच्चों को फ्री एजुकेशन दे रहा है सहवाग इंटरनेशनल स्कूल।”

सहवाग ने बताया कि हम अपने स्कूल में कोशिश करते हैं कि बच्चों को एक स्किल जरूर सीखाएं, जो उसके भविष्य में काम आए। उन्होंने कहा, बच्चों से सफलता के बजाय स्किल्स पर बात करना जरूरी है। हमें ध्यान रखना होगा कि हम बच्चों को फेल्योर हैंडल करना सिखाएं। मेरी कोशिश होती है कि बच्चे मेरे साथ में अपनी क्रिकेट स्किल्स निखार सकें। बच्चों को पढ़ना भी जरूरी है। इसलिए उनके लिए पहले सीखना जरूरी है।

दिग्गजों का जमावड़ा: खेल के मैदान से संसद तक की आवाज

‘एजुकेशन फॉर भारत’ कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, राज्य सभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी, यूजीसी चेयरमैन प्रो. विनीत जोशी समेत 60 से अधिक वक्ता आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नई शिक्षा नीति, स्किल्स और रोजगार समेत छात्रों के भविष्य से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा करेंगे। पूर्व क्रिकेट वीरेंद्र सहवाग भी अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इस कॉन्क्लेव में शिक्षा के भविष्य पर मंथन के साथ-साथ, शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्कूलों को एडिटर्स च्वाइस स्कूल एक्सीलेंस अवॉर्ड भी वितरित किए जाएंगे।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग का सत्र शामिल है। दोपहर 12:10 बजे ‘क्रिकेट के मैदान से क्लासरूम तक’ विषय पर होने वाली चर्चा में सहवाग अनुशासन, जुझारू क्षमता और हाई-परफॉर्मेंस लर्नर्स तैयार करने के अपने अनुभव साझा करेंगे।

शाम के सत्र में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भारत को कुशल बनाने’ पर अपना विजन रखेंगे। वहीं, राज्यसभा सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी एआई के युग में नेतृत्व, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

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