ऊर्जा खरीद के स्रोत को व्यापक बना रहे, मोदी-ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई: विदेश मंत्रालय

नयी दिल्ली. भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह ऊर्जा आपूर्ति के अपने स्रोतों को बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप “व्यापक और विविध बना रहा है.” भारत का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे के कुछ घंटे बाद आया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को फोन पर हुई बातचीत में उन्हें रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने का भरोसा दिलाया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्रंप के दावे से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें फोन पर ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत की तेल खरीद नीति “अस्थिर” ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने पर केंद्रित है.

जायसवाल ने कहा, “स्थिर ऊर्जा कीमतें और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना हमारी ऊर्जा नीति के दो प्रमुख लक्ष्य रहे हैं. इसमें ऊर्जा आपूर्ति के हमारे स्रोतों को व्यापक बनाना और बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप उसमें विविधता लाना शामिल है.” हालांकि, उन्होंने ट्रंप के इस दावे से जुड़े सवालों का सीधे तौर पर जवाब नहीं दिया कि मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा.

जायसवाल ने कहा, “मेरी जानकारी के मुताबिक, कल प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर कोई बातचीत नहीं हुई.” उन्होंने बताया कि मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर आखिरी बातचीत नौ अक्टूबर को हुई थी. जायसवाल ने कहा कि भारत की आयात नीतियां पूरी तरह से राष्ट्रीय हित से निर्देशित हैं और देश अमेरिका के साथ ऊर्जा संबंधों के विस्तार पर भी विचार कर रहा है. पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत का रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखना एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिसे लेकर नयी दिल्ली और वाशिंगटन के रिश्तों में भारी गिरावट भी आई है.

ट्रंप ने बुधवार को वाशिंगटन में संवाददाताओं से कहा, “उन्होंने (मोदी ने) मुझे भरोसा दिलाया है कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. यह एक बड़ा कदम है.” मोदी को अपना “मित्र” और “महान नेता” बताते हुए ट्रंप ने कहा, “हम उनके रूस से तेल खरीदने से खुश नहीं थे, क्योंकि इससे मॉस्को को यह हास्यास्पद युद्ध (यूक्रेन युद्ध) जारी रखने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने 15 लाख लोगों को गंवा दिया.” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत खरीद में तुरंत कटौती नहीं कर पाएगा, लेकिन प्रक्रिया शुरू हो गई है.

उन्होंने कहा, “यह (प्रक्रिया) शुरू हो गई है. वह इसे तुरंत नहीं कर सकते. यह थोड़ी लंबी प्रक्रिया है, लेकिन इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा.” मामले से परिचित लोगों ने कहा कि भारत के रूस से तेल खरीद रोकने का कोई सवाल ही नहीं उठता, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि खरीद की मात्रा में गिरावट आई है. जायसवाल ने कहा कि भारत द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों को ब­ढ़ावा देने के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत कर रहा है.

उन्होंने कहा, “जहां तक अमेरिका का सवाल है, हम कई वर्षों से ऊर्जा खरीद का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले एक दशक में इसमें लगातार प्रगति हुई है.” जायसवाल ने कहा, “मौजूदा प्रशासन ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को गहरा करने में दिलचस्पी दिखाई है. चर्चाएं जारी हैं.” ऊर्जा खरीद के संबंध में भारत की नीति के बारे में उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय हित से प्रेरित है.

जायसवाल ने कहा, “भारत तेल और गैस का महत्वपूर्ण आयातक है. अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना लगातार हमारी प्राथमिकता रहा है.” उन्होंने कहा, “हमारी आयात नीतियां पूरी तरह से इसी उद्देश्य से निर्देशित हैं.” ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका चाहता है कि भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद कर दे, ताकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए वित्तीय दबाव बनाया जा सके.

उन्होंने कहा था, “हम राष्ट्रपति पुतिन से बस यही चाहते हैं कि वह इसे (यूक्रेन युद्ध) रोकें, यूक्रेनियों और रूसियों को मारना बंद करें, क्योंकि वे बहुत सारे रूसियों को भी मार रहे हैं. यह एक ऐसा युद्ध है, जिसे उन्हें एक हफ्ते के अंदर जीत लेना चाहिए था, लेकिन अब यह चौथे साल में प्रवेश कर चुका है.” भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि मॉस्को नयी दिल्ली का सबसे भरोसेमंद “ऊर्जा साझेदार” है और भारत की कुल ऊर्जा खरीद में रूसी कच्चे तेल की एक-तिहाई हिस्सेदारी है.
वाशिंगटन लगातार कहता आ रहा है कि भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद के जरिये यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण में पुतिन की मदद कर रहा है.

रूसी तेल की खरीद को लेकर ट्रंप प्रशासन के भारतीय वस्तुओं के आयात पर लगाए जाने वाले टैरिफ को दोगुना करके 50 फीसदी कर देने के बाद नयी दिल्ली और वाशिंगटन के रिश्ते तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं. भारत ने अमेरिकी कार्रवाई को “अनुचित, असंगत और अविवेकपूर्ण” बताया है. हालांकि, भारत में अमेरिका के नामित राजदूत र्सिजयो गोर ने पिछले हफ्ते दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को “महत्व” देता है. मोदी से मुलाकात के पहले गोर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ भी बैठक की थी.

स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही: अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष पर भारत

भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संघर्ष से उत्पन्न स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. उन्होंने यह भी घोषणा की कि काबुल में भारत का ”टेक्निकल मिशन” अगले कुछ दिनों में दूतावास में परिर्वितत हो जाएगा.

पिछले सप्ताह काबुल पर पाकिस्तानी हवाई हमले के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष छिड़ गया. अफगानिस्तान ने इस हमले का कड़ा जवाब दिया जिसके बाद संघर्ष और ब­ढ़ गया. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है. दोनों देश (पाकिस्तान और अफगानिस्तान) बुधवार को अस्थायी संघर्षविराम पर सहमत हुए थे.

जायसवाल ने कहा, ”हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. तीन बातें स्पष्ट हैं-पहली, पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है और आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित करता है. दूसरी, अपनी आंतरिक विफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है.” उन्होंने कहा, ”और तीसरी, पाकिस्तान इस बात से नाराज है कि अफगानिस्तान अपने क्षेत्रों पर संप्रभुता का इस्तेमाल कर रहा है.” काबुल में भारतीय मिशन को और उन्नत बनाने के संबंध में उन्होंने कहा, ”हमारा ‘टेक्निकल मिशन’ जून 2022 से काबुल में कार्यरत है. अगले कुछ दिनों में इसका दूतावास में परिवर्तन हो जाएगा.” पिछले सप्ताह भारत ने काबुल स्थित ‘टेक्निकल मिशन’ को दूतावास का दर्जा देने की घोषणा की थी. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के साथ व्यापक वार्ता के बाद यह घोषणा की थी.

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