अमेरिका को दुनियाभर से प्रतिभाएं लानी होंगी: एच-1बी वीजा पर ट्रंप ने कहा

न्यूयॉर्क. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एच-1बी वीजा कार्यक्रम का बचाव करते हुए नजर आए और उन्होंने कहा कि अमेरिका को दुनिया भर से प्रतिभाओं को लाना होगा क्योंकि देश में ”कुछ खास प्रतिभाएं” नहीं हैं. ट्रंप ने फॉक्स न्यूज पर लॉरा इंग्राहम के साथ साक्षात्कार में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए यह बात कही.

उनसे पूछा गया था कि क्या एच-1बी वीजा का मुद्दा उनके प्रशासन के लिए एक बड़ी प्राथमिकता नहीं होगा. साक्षात्कारकर्ता ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अमेरिकी कामगारों का वेतन बढ.ाना चाहता है, तो देश में लाखों विदेशी कामगारों को नहीं आने दिया जा सकता.
जवाब में ट्रंप ने कहा, ”मैं सहमत हूं, लेकिन आपको प्रतिभाओं को भी लाना होगा.” जब इंग्राहम ने कहा कि ”हमारे पास बहुत प्रतिभाएं हैं”, तो ट्रंप ने कहा, ”नहीं, आपके पास नहीं हैं. आपके पास कुछ खास प्रतिभाएं नहीं हैं. और लोगों को सीखना होगा.” राष्ट्रपति ने कहा, ”आप लोगों को बेरोजगारी की कतार से हटाकर यह नहीं कह सकते कि ‘मैं तुम्हें किसी कारखाने में लगा दूंगा, हम मिसाइल बनाएंगे’.”

उन्होंने कहा, ”जॉर्जिया में, उन्होंने अवैध प्रवासियों को खोजने के लिए छापे मारे. वहां दक्षिण कोरिया के लोग थे जिन्होंने जिंदगी भर बैटरी बनाईं. आप जानते हैं, बैटरी बनाना बहुत जटिल है. यह कोई आसान काम नहीं है, और बहुत खतरनाक भी है. बहुत सारे विस्फोट, बहुत सारी समस्याएं.” ट्रंप ने कहा, ”उनके पास शुरुआती दौर में बैटरी बनाने और लोगों को यह काम सिखाने के लिए लगभग 500-600 लोग थे. खैर, वे चाहते थे कि वे देश से बाहर निकल जाएं.” उन्होंने कहा कि लेकिन ”आपको जरूरत पड़ेगी… मेरा मतलब है, मैं जानता हूं कि आप और मैं इस पर असहमत हैं.”

उन्होंने कहा, ”आप यूं ही नहीं कह सकते कि कोई देश आ रहा है, एक प्लांट बनाने के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने जा रहा है और उन लोगों को बेरोजगारी की कतार से हटाने जा रहा है जिन्होंने पांच साल से काम नहीं किया है, और वे मिसाइलें बनाना शुरू करने जा रहे हैं. यह इस तरह से काम नहीं करता.” ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में दुरुपयोग की जांच के लिए व्यापक कार्रवाई शुरू की है. इस कार्यक्रम का उपयोग कंपनियां, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी कंपनियां, अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए करती हैं.

भारतीय पेशेवर, जिनमें प्रौद्योगिकी कर्मचारी और चिकित्सक शामिल हैं, एच-1बी वीजा धारकों के सबसे बड़े समूह में शामिल हैं.
इस वर्ष सितंबर में, ट्रंप ने एच-1बी गैर-आप्रवासी वीजा कार्यक्रम में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम के रूप में ”कुछ गैर-आप्रवासी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध” शीर्षक से एक घोषणा की थी.

इस घोषणा के तहत, 21 सितंबर, 2025 के बाद दायर की गई कुछ एच-1बी याचिकाओं के साथ पात्रता की शर्त के रूप में एक लाख डॉलर का अतिरिक्त भुगतान होना आवश्यक है. पिछले सप्ताह, ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के दुरुपयोग की लगभग 175 जांच शुरू कीं, जिनमें कम वेतन, ऐसे कार्यस्थल जो मौजूद नहीं थे और कर्मचारियों की ‘बेंचिंग’ की प्रथा जैसी खामियां शामिल हैं. अमेरिका के श्रम विभाग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, ”अमेरिकी नौकरियों की रक्षा के हमारे मिशन के तहत, हमने 175 जांचें शुरू की हैं.”

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