देश में 12 हजार मोबाइल टॉवर लगाने का काम अगले साल तक पूरा हो जाएगा: सिंधिया

नयी दिल्ली. संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच के मुताबिक, देश में जल्द ही सभी क्षेत्रों में 4जी कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य है और जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों समेत कई जगहों पर अगले साल तक 12 हजार 4जी टॉवर लगाए जाएंगे.

सिंधिया ने लोकसभा में जम्मू कश्मीर से निर्दलीय सदस्य अब्दुल रशीद शेख के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह बात कही.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच के मुताबिक, देश में जल्द ही 4जी कनेक्टिविटी सभी क्षेत्रों में पहुंचाना है. ”इस लिहाज से पिछले एक वर्ष में करीब 25 हजार टॉवर लग चुके हैं.” सिंधिया ने कहा कि बाकी 12 हजार टॉवर लगाने का कार्य प्रगति पर है और इन्हें अगले साल तक लगा लिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि ये टॉवर जम्मू कश्मीर के ऐसे क्षेत्रों में भी लगाए जाने हैं जहां नेटवर्क की समस्या है. सिंधिया ने मोबाइल टॉवर लगने में देरी के लिए राज्य सरकार से अनुमति की जरूरत और सर्वे आदि कारक गिनाए. उन्होंने कहा कि गत अप्रैल में एक-एक टॉवर के बारे में विश्लेषण किया गया और इन्हें लगाने में देरी के कुल 2,415 कारण देशभर में सामने आए. सिंधिया ने कहा, ”हमने एक-एक कारण को रेखांकित किया. राज्य सरकार से पत्राचार के अलावा मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों से बात की.” उन्होंने कहा कि इन 2,415 कारणों में से पिछले सोमवार तक 1,990 पर पूरी तरह समाधान निकाला जा चुका है.

संचार साथी ऐप से न जासूसी संभव है और न होगी: सिंधिया
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को कहा कि ‘संचार साथी’ ऐप के माध्यम से न तो जासूसी (स्नूपिंग) संभव है और ना होगी. सिंधिया ने सभी नए मोबाइल उपकरणों में साइबर सुरक्षा के लिहाज से इस ऐप को प्रीलोड करने के सरकार के निर्देश पर उठे विवाद के बीच लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह बात कही.

उन्होंने कहा कि संचार साथी ”ऐप के आधार पर न स्नूपिंग संभव है, न होगी.” सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार देश की जनता के हाथ में अधिकार देना चाहती है ताकि वे खुद को सुरक्षित रख सकें. उन्होंने कहा कि जनता की प्रतिक्रिया पर मिली सफलता के आधार पर यह प्रयोग किया गया है और भविष्य में जनता के ही सुझावों के आधार पर सरकार इसमें परिवर्तन के लिए तैयार है. संचार मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का इस बारे में कोई ”हठ” नहीं है. संचार मंत्रालय के 28 नवंबर के आदेश में सभी मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं को सभी नए हैंडसेट में अनिवार्य रूप से ‘संचार साथी’ ऐप पहले से इंस्टॉल करने को कहा गया है और मौजूदा मोबाइल फोन पर अपडेट के माध्यम से इसे इंस्टॉल करने का निर्देश दिया गया है.

सरकार के इस आदेश पर विवाद शुरू हो गया. मंगलवार को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा और अन्य कुछ विपक्षी सदस्यों ने इसे अनिवार्य किए जाने की आलोचना करते हुए कहा, “लोगों को यह अधिकार होना चाहिए कि वे सरकार की निगरानी के बिना निजी संदेश भेज सकें.” इस पर सफाई देते हुए सिंधिया ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में कहा कि इस ऐप को भी मोबाइल पर अन्य ऐप की तरह हटाया जा सकता है.

उन्होंने बुधवार को सदन में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग और धोखाधड़ी से नागरिकों को बचाने की सोच के साथ 2023 में ‘संचार साथी’ पोर्टल की शुरुआत की गई थी और 2025 में इसके लिए ऐप का प्रयोग शुरू किया गया.

उन्होंने कहा कि इस ऐप से जनभागीदारी के आधार पर साइबर धोखाधड़ी से नागरिकों को बचाना और मोबाइल चोरी की घटनाओं को कम करना ही उद्देश्य है. सिंधिया ने कहा कि पोर्टल पर जनता की अच्छी प्रतिक्रिया के आधार पर ही सरकार ने इस दिशा में कदम बढ.ाया. उन्होंने बताया कि पोर्टल पर जनता की प्रतिक्रिया से चोरी के लाखों मोबाइल फोन का पता चला, वहीं धोखाधड़ी के छह लाख मामलों को रोका जा सका.

सिंधिया ने साफ किया कि संचार साथी ऐप के माध्यम से नागरिकों को विकल्प दिया गया है और जब तक वे इस पर पंजीकरण नहीं करते, उनके मोबाइल में यह काम नहीं करेगा. उन्होंने कहा, ”पूरा अधिकार नागरिक का है. हमने केवल सभी को यह ऐप उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाया है.”

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