रूस के राष्ट्रपति पुतिन दो दिन के दौरे पर दिल्ली पहुंचे, प्रधानमंत्री मोदी ने हवाईअड्डे पर किया स्वागत

नयी दिल्ली/मॉस्को. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बृहस्पतिवार शाम को दो दिन के दौरे पर नयी दिल्ली पहुंचे. राष्ट्रपति पुतिन करीब 27 घंटे भारत में बिताएंगे. यह दौरा करीब आठ दशक पुरानी भारत-रूस साझेदारी को और मजबूत करना है, एक ऐसी साझेदारी जो जटिल भू-राजनीतिक माहौल के बावजूद स्थिर बनी हुई है.

भारत इस दौरे को कितनी अहमियत दे रहा है, यह इस बात से पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पालम हवाई अड्डे पर गले लगाकर पुतिन का स्वागत किया और चार साल के अंतराल के बाद भारत आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. दोनों नेता एक ही कार में हवाई अड्डे से निकले. करीब तीन महीने पहले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के बाद चीन के शहर तियानजिन में उन्होंने एक ही वाहन में साथ यात्रा की थी.

मोदी आज शाम पुतिन के लिए एक निजी रात्रिभोज का आयोजन कर रहे हैं. पिछले साल जुलाई में रूस की राजधानी मॉस्को के दौरे के दौरान रूसी नेता ने भी भारत के प्रधानमंत्री की मेहमाननवाजी की थी. आज शाम दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत से शुक्रवार को होने वाली 23वीं भारत-रूस शिखर वार्ता को लेकर माहौल बनने की उम्मीद है, जिसके कई महत्वपूर्ण परिणाम निकलने की संभावना है.

दोनों नेताओं के बीच होने वाली वार्ता का मुख्य विषय रक्षा संबंधों को मजबूत करना, भारत-रूस व्यापार को बाहरी दबाव से सुरक्षित रखना और छोटे मॉड्यूलर संयंत्रों में सहयोग की संभावनाओं की तलाश जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगा. इस बैठक पर पश्चिमी देशों द्वारा करीबी नजर रखे जाने की संभावना है. रूसी नेता का नयी दिल्ली का यह दौरा इसलिए और भी अहम हो गया है क्योंकि यह भारत-अमेरिका संबंधों में तेजी से आ रही गिरावट की पृष्ठभूमि में हो रहा है. बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापार के क्षेत्रों सहित कई समझौते होने की उम्मीद है.

दोनों नेताओं के बीच बैठक से पहले शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन में पुतिन का औपचारिक स्वागत किया जाएगा. बैठक हैदराबाद हाउस में होगी, जहां मोदी, पुतिन और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए भोज का आयोजन करेंगे और इस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा भी होगी. इस मामले के जानकार लोगों के अनुसार, पुतिन शुक्रवार की सुबह राजघाट भी जाएंगे. बैठक के बाद पुतिन रूसी सरकारी प्रसारक का नया ‘इंडिया चैनल’ भी शुरू करेंगे, जिसके बाद वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उनके सम्मान में दिए जाने वाले राजकीय भोज में शामिल होंगे. रूसी नेता के शुक्रवार की रात करीब नौ बजे भारत से रवाना होने की संभावना है.

शिखर वार्ता में उम्मीद है कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने से ब­ढ़ते व्यापार घाटे को दुरुस्त करने पर जोर देगा.
रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में संभवत? सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं ओर अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है.

शिखर वार्ता में भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिकी प्रतिबंध के असर पर चर्चा होने की संभावना है. ‘क्रेमलिन’ (रूस के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के कारण भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद ”कुछ समय” के लिए कम हो सकती है. उन्होंने कहा, हालांकि रूस आपूर्ति ब­ढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है.

बैठक में उम्मीद है कि पुतिन मोदी को यूक्रेन विवाद को खत्म करने के लिए अमेरिका की नयी कोशिशों के बारे में बताएंगे. भारत लगातार यह कहता रहा है कि बातचीत और कूटनीति ही युद्ध खत्म करने का एकमात्र तरीका है. मोदी-पुतिन वार्ता के बाद दोनों पक्षों के बीच कई समझौते होने की उम्मीद है, जिसमें एक समझौता भारतीय कामगारों के रूस आने-जाने को आसान बनाने और अन्य (समझौता) व्यापक रक्षा सहयोग के ढांचे के तहत साजो सामान के समर्थन से संबंधित है.

ऐसा माना जा रहा है कि व्यापार क्षेत्र के अंतर्गत फार्मा, कृषि, खाद्य उत्पादों और उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्रों में रूस को भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है. यह कदम रूस के पक्ष में ब­ढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भारत की चिंताओं के बीच उठाया गया है. भारत रूस से सालाना लगभग 65 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान और सेवाएं खरीदता है, जबकि रूस भारत से लगभग पांच अरब डालर का आयात करता है.

अधिकारियों ने कहा कि भारत उर्वरक क्षेत्र में सहयोग ब­ढ़ाने पर भी विचार कर रहा है. रूस सालाना भारत को 30 से 40 लाख टन उर्वरक की आपूर्ति करता है. भारतीय और रूसी पक्ष यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ भारत के प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा कर सकते हैं. शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने बृहस्पतिवार को व्यापक चर्चा की, जिसमें रूस से एस-400 मिसाइल प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य हार्डवेयर की अतिरिक्त खेप खरीदने की भारत की योजना पर फोकस रहा. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एस-400 मिसाइल प्रणाली बहुत प्रभावी साबित हुई.

अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की पांच इकाइयों को खरीदने के लिए पांच अरब अमेरीकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अनुबंध पर आगे ब­ढ़ने से काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के प्रावधानों के तहत अमेरिकी प्रतिबंध लग सकते हैं. पेस्कोव ने कहा कि रूस द्वारा भारत को एसयू-57 लड़ाकू विमान आपूर्ति करने की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है. भारत पांचवीं पी­ढ़ी के लड़ाकू विमानों की एक खेप खरीदने की प्रक्रिया में है.

दसॉ एविएशन का राफेल, लॉकहीड मार्टिन का एफ-21, बोइंग का एफ/ए-18 और यूरोफाइटर टाइफून मुख्य दावेदार हैं. बैठक में द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर भी प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद है. माना जाता है कि रूस ने भारत को कच्चे तेल की खरीद पर अतिरिक्त छूट की पेशकश की है. यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब दो रूसी तेल उत्पादकों पर अमेरिकी प्रतिबंधों की नवीनतम लहर के बाद पिछले कुछ सप्ताहों में भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद की मात्रा में गिरावट दर्ज की गई है.

भारत और रूस के बीच एक व्यवस्था है जिसके तहत भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति संबंधों के संपूर्ण पहलुओं की समीक्षा के लिए सालाना एक शिखर बैठक आयोजित करते हैं. अब तक, भारत और रूस में बारी-बारी से 22 वार्षिक शिखर बैठकें हो चुकी हैं. रूसी राष्ट्रपति ने आखिरी बार 2021 में नयी दिल्ली का दौरा किया था. पिछले साल जुलाई में मोदी वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए मॉस्को गए थे. रूस भारत के लिए एक ऐसा साझेदार रहा है जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है और वह भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ रहा है.

सीतारमण ने रूस के प्रथम उपप्रधानमंत्री से की मुलाकात, आपसी हित के मुद्दों पर हुई चर्चा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को रूस के प्रथम उपप्रधानमंत्री डेनिस मेंटुरोव के नेतृत्व वाले एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की जिसमें निवेश, बैंकिंग और वित्त सहित आपसी हित के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई. वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत और रूस दोनों ने पांच दिसंबर, 2025 को होने वाले आगामी 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन से मजबूत परिणामों की उम्मीद जताई है.

मंत्रालय ने कहा कि रूस के प्रथम उपप्रधानमंत्री ने ब्रिक्स समूह की आगामी अध्यक्षता के लिए भारत को मजबूत समर्थन दिया.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बृहस्पतिवार शाम को भारत दौरे पर नयी दिल्ली पहुंचे. वह भारत-रूस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिरकत करेंगे.

यूक्रेन से युद्ध समाप्ति को लेकर अमेरिकी प्रस्ताव में कुछ बिंदुओं पर सहमत नहीं हुआ जा सकता: पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने की अमेरिकी योजना के कुछ प्रस्ताव मॉस्को को अस्वीकार्य हैं. उन्होंने बृहस्पतिवार की टिप्पणियों में संकेत दिया कि किसी भी समझौते पर पहुंचने में अभी काफी समय लगेगा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस द्वारा यूक्रेन पर लगभग चार साल पहले शुरू किए गए बड़े हमले के बाद से युद्धविराम के लिए अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक कोशिश शुरू की है. लेकिन यह प्रयास फिर से ऐसी मांगों में उलझ गया है जिनका समाधान मुश्किल है, जिसमें खासतौर पर यह मुद्दे हैं कि क्या यूक्रेन को अपनी जमीन रूस को देनी होगी और भविष्य में मॉस्को की किसी भी आक्रामक कार्रवाई से उसे कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है.

ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ बृहस्पतिवार को मियामी में यूक्रेन के प्रमुख वार्ताकार रुस्तेम उमेरोव से मुलाकात करेंगे. पुतिन ने कहा कि यूक्रेन से युद्ध समाप्त करने को लेकर अमेरिकी दूतों के साथ उनकी पांच घंटे की वार्ता ‘आवश्यक’ और ‘उपयोगी’ थी, लेकिन यह एक ”कठिन कार्य” था, क्योंकि कुछ प्रस्ताव मॉस्को के लिए अस्वीकार्य थे. पुतिन ने बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली की यात्रा से पहले ‘इंडिया टुडे’ टीवी चैनल के साथ बातचीत की. रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने पुतिन के हवाले से कहा कि मंगलवार की वार्ता में दोनों पक्षों को अमेरिकी शांति प्रस्ताव के ”प्रत्येक बिंदु पर विचार करना पड़ा, इसी कारण इसमें इतना लंबा समय लगा.”

रूसी राष्ट्रपति ने कहा, ”यह बातचीत बहुत आवश्यक थी और इसमें ठोस चर्चा की गई.” पुतिन ने कहा कि कुछ प्रावधानों पर मॉस्को चर्चा के लिए तैयार था, जबकि अन्य पर ”हम सहमत नहीं हो सकते.” हालांकि, पुतिन ने यह विस्तार से बताने से इनकार कर दिया कि रूस क्या स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है.

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