बंगाल की जनता ने एसआईआर को आशा की किरण के रूप में देखा: शुभेंदु अधिकारी


कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को ह्लनिडरतापूर्वकह्व जारी रखने का आग्रह किया। यह पत्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दो दिन पहले इस प्रक्रिया को रोकने की मांग किए जाने के बाद लिखा गया है।
अधिकारी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री द्वारा एसआईआर को रोकने का आह्वान हार स्वीकार करनेह्व से कम नहीं है और यह उनके कार्यकाल की पहचान बने ह्लचुनावी कदाचार को जारी रखने की एक शर्मनाक कोशिशह्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि बनर्जी की ह्लशिकायतों की लंबी सूचीह्व न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि निर्वाचन आयोग को ह्लराजनीतिक रूप से प्रेरितह्व बताकर बदनाम करने और आम लोगों के बीच परेशान होने तथा मताधिकार से वंचित किए जाने की झूठी कहानी गढ़ने की जुगत है।
‘एक्स’ पर साझा किए गए पत्र में अधिकारी ने दावा किया, ह्लइसके विपरीत, पश्चिम बंगाल की जनता ने एसआईआर को आशा की किरण के रूप में देखा है। ‘ंिचता और परेशानी’ की उनकी झूठी कहानी तृणमूल द्वारा रचा गया एक भ्रम का जाल है, जिसे उन लोगों ने तोड़ दिया है जो उनकी संरक्षण की राजनीति को नकारते हैं और निष्पक्ष मतदान को तरजीह देते हैं।’’ बेवजह की जल्दबाजी और अपर्याप्त तैयारी के आरोपों को खारिज करते हुए अधिकारी ने कहा कि राज्य में 50,000 से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) और मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और तृणमूल सदस्य जमीनी स्तर के अधिकारियों को डरा-धमका कर और गलत सूचना फैलाकर एसआईआर में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा, ह्लमैं निर्वाचन आयोग से आग्रह करता हूं कि वह लोकतांत्रिक जनसमूह के अटूट समर्थन से सशक्त होकर निडरतापूर्वक एसआईआर को आगे बढ़ाए। यह प्रक्रिया संविधान पर हमला नहीं, बल्कि उसकी सच्ची पुष्टि है जो हमारे चुनावों पर लंबे समय से छाए अंधकार को दूर करती है।
इससे पहले, तीन जनवरी को लिखे एक पत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयुक्त से राज्य में ह्लमनमानी और त्रुटिपूर्णह्व एसआईआर को रोकने का आग्रह किया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि मौजूदा स्थितियों में इसके जारी रहने से ह्लबड़े पैमाने पर लोगों का मताधिकार छीन सकता है’’ और यह ह्ललोकतंत्र की नींव पर प्रहारह्व होगा।





