होर्मुज के रास्ते भारत आया एक और जहाज, 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर गुजरात पहुंचा

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत के लिए एलपीजी और कच्चा तेल लेकर आए भारतीय ध्वज वाले टैंकर सुरक्षित रूप से गुजरात के बंदरगाहों तक पहुंच रहे हैं। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर तत्काल राहत मिली है।

जग लाडकी पहुंचा मुंद्रा पोर्ट

गुजरात के मुंद्रा स्थित अदाणी पोर्ट्स पर भारतीय ध्वज वाले क्रूड ऑयल टैंकर जग लाडकी का आगमन हुआ। यह टैंकर संयुक्त अरब अमीरात से कच्चा तेल लेकर पहुंचा है। टैंकर में करीब 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा था, जिसे फुजैराह बंदरगाह से लोड किया गया था। जग लाडकी युद्ध क्षेत्र से अदानी समूह के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचने वाला दूसरा जहाज है। इससे पहले, एलपीजी टैंकर शिवालिक सोमवार को बंदरगाह पर पहुंचा था।

खास बात यह है कि जहाज उसी दिन रवाना हुआ था, जब फुजैरा के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था। शिवालिक और नंदा देवी के बाद यह भारत पहुंचने वाला तीसरा जहाज है। यह जहाज फारस की खाड़ी से अरब सागर को जोड़ने वाले अहम समुद्री रास्ते होर्मुज से होकर भारत पहुंचा।

एक दिन पहले नंदा देवी पहुंचा वाडीनार पोर्ट
एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मंगलवार को वाडीनार पहुंचा, जहां एंकरिज क्षेत्र में शिप-टू-शिप (STS) ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू की गई। मिली जानकारी के मुताबिक, ‘नंदा देवी’ से यह एलपीजी MT BW Birch नामक दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया जाएगा। यह ट्रांसफर आज से शुरू होने वाला है, जो देश में एलपीजी आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस दौरान दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह ने खुद नंदा देवी जहाज पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जहाज के कैप्टन और क्रू मेंबर्स से बातचीत कर ट्रांसफर प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

सरकार ने क्या दिए निर्देश?

सरकार ने प्रमुख बंदरगाहों को जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने और कार्गो ऑपरेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत एंकरिज, बर्थ हायर और स्टोरेज शुल्क में रियायत दी जा रही है, साथ ही जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी में अस्थायी ट्रांसशिपमेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

इधर, एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश के बाद एचपीसीएल मित्तल एनर्जी (बठिंडा) और रिलायंस रिफाइनरी (जामनगर) ने रेल रेक्स की अतिरिक्त मांग रखी है, ताकि गैस की आपूर्ति देशभर में तेजी से पहुंचाई जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया भर में तेल और गैस की करीब 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। इसलिए इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री रास्ते पर काफी हद तक निर्भर है।



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