लितानी नदी के उत्तर तक पहुंचीं इस्राइली सैन्य टुकड़ियां, लेबनान में युद्ध का दायरा बढ़ा

दक्षिणी लेबनान में इस्राइल ने अपने सैन्य अभियान का दायरा और बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस्राइली सैनिक अब लितानी नदी के उत्तर की ओर बढ़ते हुए जावतार अल-शरकियाह, मेफदाउन और जवतर अल-गरबियाह जैसे क्षेत्रों तक पहुंच गए हैं। ये इलाके दक्षिणी लेबनान के दूसरे सबसे बड़े शहर नबातीह के दक्षिण-पूर्व में स्थित हैं।

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक यह सैन्य बढ़त पिछले कई दिनों से जारी है, लेकिन बीते 24 घंटों में हमलों की संख्या और तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। माना जा रहा है कि इस्राइली सेना हिजबुल्लाह की दूसरी और तीसरी रक्षा पंक्तियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस अभियान का एक उद्देश्य पश्चिमी बेका घाटी को दक्षिणी लेबनान के अन्य हिस्सों से अलग करना भी हो सकता है। यह कार्रवाई इस्राइल द्वारा घोषित 10 किलोमीटर गहरे “येलो सिक्योरिटी ज़ोन” से आगे बढ़कर की जा रही है, जिससे सैन्य अभियान के विस्तार के संकेत मिल रहे हैं।

एशिया के प्रमुख रक्षा सम्मेलन से चीन के शीर्ष नेता दूर, ईरान संकट पर चर्चा की संभावना कम

एशिया के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा और सुरक्षा मंचों में से एक, शांग्री-ला संवाद का आगाज शुक्रवार से होने जा रहा है। इस बार सम्मेलन में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का मुद्दा प्रमुख रहने की संभावना है, लेकिन चीन के शीर्ष अधिकारियों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सम्मेलन में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। हालांकि, चीन के वरिष्ठ नेताओं और रक्षा अधिकारियों के शामिल नहीं होने की खबरों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा का दायरा सीमित होने की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया चीन के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम स्रोत है। समुद्री व्यापार पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में चीन के कुल समुद्री कच्चे तेल आयात का 57 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से आया था, जो प्रतिदिन लगभग 59 लाख बैरल के बराबर है।

हालांकि, फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान द्वारा रणनीतिक महत्व वाले होर्मुज को बंद किए जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है।

यौन हिंसा और मारपीट के आरोपों से घिरा फ्लोटिला मामला, फ्रांस करेगा जांच

फ्रांस ने गाजा के लिए रवाना हुए एक्टिविस्ट जहाज के फ्रांसीसी नागरिकों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में जांच की मांग की है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने कहा कि उन्हें तुर्की स्थित फ्रांसीसी महावाणिज्य दूत से मिली रिपोर्ट में यौन हिंसा, ठंड में रखने, मारपीट और बार-बार अपमानित किए जाने के आरोपों की जानकारी मिली है।

बारो ने बताया कि इन आरोपों को संभावित आपराधिक अपराध मानते हुए मामले को सार्वजनिक अभियोजक के पास भेज दिया गया है। यह घटना उस समय हुई जब गाजा के लिए मानवीय सहायता लेकर जा रहे ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला को पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इजरायली बलों ने रोक लिया था।

फ्लोटिला में शामिल कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हिरासत के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। कई लोग घायल हुए और कम से कम 15 लोगों ने यौन उत्पीड़न, जिसमें दुष्कर्म के आरोप भी शामिल हैं, की शिकायत की है। हालांकि, बाद में सभी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया।



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