अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी पर स्थिति शांतिपूर्ण रही


अमृतसर: ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी पर शनिवार को स्थिति शांतिपूर्ण रही, हालांकि इस दौरान अकाल तख्त के बाहर खालिस्तान समर्थक नारेबाजी की गई। खालिस्तान समर्थक नारे पूर्व सांसद सिमरनजीत ंिसह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के कार्यकर्ताओं ने लगाए। मान भी मौके पर मौजूद थे।
डूर साहिब से सांसद अमृतपाल ंिसह के समर्थक भी उनके चित्रों के साथ दिखाई दिए। अमृतपाल ंिसह वर्ष 2023 में थाने पर हमले से जुड़े मामले में वर्तमान में असम की एक जेल में बंद हैं। कट्टरपंथी सिख संगठन दल खालसा के कार्यकर्ता भी क्षतिग्रस्त अकाल तख्त की तस्वीरें तथा मारे गए जरनैल ंिसह ंिभडरावाले के चित्र वाली तख्तियां लिए हुए नजर आए।
अकाल तख्त पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल दल खालसा के नेताओं ने बेअदबी-रोधी कानून को खारिज किए जाने के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप ंिसह गड़गज के फैसले का समर्थन किया और पंजाब सरकार को सिख धार्मिक मामलों से दूर रहने की चेतावनी दी। स्वर्ण मंदिर परिसर में पूरे परिक्रमा मार्ग में खालिस्तान समर्थक नारेबाजी की गई। इस दौरान कई युवा तख्तियां लिए दिखाई दिए।
ऑपरेशन ब्लू स्टार वर्ष 1984 में चलाया गया एक सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य स्वर्ण मंदिर परिसर में डेरा डाले आतंकवादियों को बाहर निकालना था। अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप ंिसह गड़गज ने अरदास के दौरान बलवंत ंिसह राजोआणा सहित ‘बंदी ंिसहों’ की रिहाई की मांग की।
‘बंदी ंिसह’ उन सिख कैदियों को कहा जाता है जिनके बारे में शिरोमणि अकाली दल और अन्य सिख संगठनों का दावा है कि वे अपनी सजा पूरी होने के बाद भी जेलों में बंद हैं। इस अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने जून 1984 में सेना की कार्रवाई के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर में जरनैल ंिसह ंिभडरावाले के साथ मारे गए सिख नेताओं के परिजनों को सम्मानित किया। इस बीच, कट्टरपंथी संगठन दल खालसा के आह्वान पर स्वर्ण मंदिर के आसपास तथा पुराने शहर के भीतरी क्षेत्रों में बंद शांतिपूर्ण रहा। स्वर्ण मंदिर परिसर और उसके आसपास व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए।






