सोनम रघुवंशी को जमानत देने के आदेश पर रोक से उच्चतम न्यायालय का इनकार

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार सोनम रघुवंशी को जमानत देने से संबंधित मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले पर प्रथम दृष्टया कुछ आपत्ति जताई लेकिन जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस तथ्य पर गौर किया कि रघुवंशी जेल से रिहा हो चुकी है और निचली अदालत की जमानत की शर्तों के अनुसार शिलांग में रह रही है।

राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रघुवंशी पर लगे आरोप बहुत गंभीर हैं और उसे सिर्फ तकनीकी कारणों के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। मेहता ने कहा कि यह मामला “वाकई बहुत चौंकाने वाला” है। उन्होंने उच्च न्यायालय के जमानत आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए कहा कि जमानत इस आधार पर दी गई कि गिरफ्तारी के सभी कारण नहीं बताए गए थे।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “यह वही मामला है जिसमें पति-पत्नी हनीमून मनाने मेघालय गए थे। यह पहले से सोची-समझी हत्या थी। इसमें उसके तीन साथी भी शामिल थे। उसने पहाड़ी पर अपने पति की हत्या की और शव को गहरी खाई में फेंक दिया। तीनों हमलावर और खुद महिला भी हमले में शामिल थे। इसके बाद वह फरार हो गई थी और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार की गई।” उन्होंने कहा कि अगर उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो वह फरार हो सकती है।

मेहता ने ट्रांजिट रिमांड देने से संबंधित उत्तर प्रदेश के मजिस्ट्रेट के फैसले का भी जिक्र किया जिन्होंने अपने आदेश में लिखा था कि गिरफ्तारी के कारण सोनम को बताए गए थे। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि रघुवंशी की पहले भी कई जमानत याचिकाएं खारिज हुईं और कभी यह नहीं कहा गया कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज नहीं दिए गए।

उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या की सजा) की जगह गलती से धारा 403(1) लिख दी गई थी, जो सिर्फ टाइंिपग की गलती थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसी आधार पर जमानत को सही माना। जब उच्चतम न्यायालय ने पूछा कि मुकदमे की सुनवाई किस चरण में है, तो मेहता ने बताया कि सुनवाई जारी है और 94 गवाहों में से अब तक चार गवाहों की गवाही हो चुकी है।

उच्चतम न्यायालय ने रघुवंशी के वकील से कहा, “प्रथम दृष्टया हमें उच्च न्यायालय के फैसले पर कुछ आपत्ति है। जिस तरह उच्च न्यायालय ने इस मामले पर गौर किया है, उस पर हमें आपत्ति है।” न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि गिरफ्तारी के कारण रघुवंशी को बताए गए थे और इसका उल्लेख मजिस्ट्रेट के आदेश में भी है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले की जमानत याचिकाओं में यह मुद्दा नहीं उठाया गया था।

उन्होंने कहा, “उसके बाद अचानक आपको यह बात समझ आई और आपने यह आधार बताया। क्या सिर्फ इसलिए जमानत दी जा सकती है कि एक गलत धारा लिख दी गई थी, जबकि पहले मेरिट के आधार पर जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी?” सोनम के वकील ने कहा कि उन्हें कभी भी गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए।

उन्होंने कहा कि ट्रांजिट रिमांड के समय मजिस्ट्रेट के सामने सोनम का कोई वकील मौजूद नहीं था और उन्हें सिर्फ एक ‘मेमो’ दिया गया था।
इस पर न्यायमूर्ति सुंदरेश ने पूछा कि अगर ऐसा था, तो क्या यह बात इतनी देरी के बाद सामने रखी जा सकती है? पीठ ने कहा, “अगर सिर्फ इसी वजह से जमानत दी गई है, तो कानून के तहत राज्य सरकार चाहे तो उसे दोबारा गिरफ्तार कर सकती है।” सोनम के वकील ने कहा कि निचली अदालत ने जमानत की कड़ी शर्तें लगाई हैं और उसे शिलांग में ही रहना होगा, इसलिए उसके फरार होने की आशंका नहीं है।

इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं, इसलिए वह जमानत आदेश पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है।
अदालत ने कहा, “अगर वह रिहा हो चुकी है, तो हम अब इस आदेश पर रोक नहीं लगा सकते।” अदालत ने यह भी कहा कि उसे पहले लगा था कि वह अब भी जेल में है।

इसके बाद सॉलिसिटर जनरल ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए अदालत को मनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पत्नियों द्वारा पतियों की हत्या के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने हाल ही के लोहागढ़ मामले का भी जिक्र किया, जिसमें एक महिला पर अपने मंगेतर की हत्या का आरोप है।
न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर सभी पक्षों को आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने बेंगलुरु के एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया।

मेघालय सरकार ने बृहस्पतिवार को रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। मध्यप्रदेश के इंदौर की रहने वाली रघुवंशी को पिछले साल जून में अपने कारोबारी पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। दोनों पिछले साल 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में घूमने गए थे और वहीं लापता हो गए थे। इसके बाद दो जून 2025 को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई में मिला था।

पुलिस का आरोप है कि सोनम रघुवंशी ने पैसों के लालच में अपने पति की हत्या कराने के लिए भाड़े के हमलावरों के साथ साजिश रची थी। मेघालय उच्च न्यायालय ने 29 जून को निचली अदालत द्वारा रघुवंशी को दी गई जमानत को सही ठहराया था। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की एक याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें 27 अप्रैल को निचली अदालत की ओर से दी गई जमानत रद्द करने की मांग की गई थी।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि गिरफ्तारी के कारण जिस तरीके से तय किए गए, उससे यह साफ दिखता है कि इसमें “न्यायिक दृष्टिकोण का पूरी तरह अभाव” था।



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