श्रीलंका में दित्वा चक्रवात के कारण 330 से अधिक लोगों की मौत, भारत की मदद से बचाव अभियान जारी

कोलंबो. भारतीय वायु सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के र्किमयों ने चक्रवात दित्वा से हुई तबाही के बाद रविवार को भी श्रीलंकाई अधिकारियों को बचाव और राहत प्रयासों में सहायता जारी रखी. दित्वा चक्रवात के कारण 330 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है.

श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) की ओर से रविवार शाम छह बजे जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, 16 नवंबर से दित्वा और चरम मौसम की स्थिति के कारण आई विनाशकारी बा­ढ़ और भूस्खलन में अब तक 334 लोगों की मौत हो चुकी है और 370 लोग लापता हैं. डीएमसी ने बताया कि 3,09,607 परिवारों के 11,18,929 लोग खराब मौसमी स्थितियों से प्रभावित हुए हैं.
एनडीआरएफ की टीम ने कोलंबो के कोच्चिकड़े में बचाव अभियान चलाया.

श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हुए, उन्होंने गंभीर बा­ढ़ से प्रभावित परिवारों की सहायता की और तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की.” भारत ने ऑपरेशन ‘सागर बंधु’ के तहत द्वीपीय राष्ट्र में 80 एनडीआरएफ र्किमयों वाली दो शहरी खोज और बचाव टीमें भेजीं, जिससे ‘पड़ोसी प्रथम’ की भावना की पुष्टि हुई.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “एनडीआरएफ के कर्मी श्रीलंका में स्थानीय अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय के तहत राहत अभियान जारी रखे हुए हैं.” भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने एक साहसिक अभियान के तहत भारत, जर्मनी, स्लोवानिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिकों समेत फंसे हुए यात्रियों को एक प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर निकाला.
भारतीय वायुसेना ने रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “एक गरुड़ कमांडो को समूह को सड़क या पथ के बजाय खेतों, जंगलों आदि के माध्यम से निर्देशित करते हुए कोटमाले में पूर्व-संचालित हेलीपैड तक ले जाने के लिए नीचे उतारा गया, जहां से 24 यात्रियों – जिनमें भारतीय, विदेशी नागरिक और श्रीलंकाई शामिल थे – को कोलंबो पहुंचाया गया.” वायुसेना ने कहा कि एक समानांतर अभियान के दौरान तीन गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए हेलीकॉप्टर के जरिये अस्पताल भेजा गया.

इसके अलावा वायुसेना की टीम ने श्रीलंकाई सेना के “पांच टीमों (40 सैनिकों)” को भी दियाथलावा सैन्य शिविर से कोटमाले क्षेत्र में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर से पहुंचाया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारतीय वायुसेना के अभियान के बाद कहा, “जरूरत के समय में हम साथ हैं”. विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से दो चेतक हेलीकॉप्टर भी बचाव अभियान में शामिल हुए.

साहस और धैर्य का असाधारण प्रदर्शन करते हुए, शनिवार को एक चेतक टीम ने छत पर फंसे चार लोगों के एक परिवार को बचाया.
इस बीच, भारतीय वायुसेना ने त्वरित मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) कार्यों के लिए कोलंबो में एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर भी तैनात किए हैं.

भारतीय वायुसेना ने कहा, “भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर निकालने के लिए भारतीय वायुसेना के परिवहन विमानों को तैनात किया गया है, तथा त्रिवेंद्रम और हिंडन से कई मिशनों की योजना बनाई गई है.” उसने कहा कि प्रभावित समुदायों की सहायता के लिए निकासी के साथ-साथ भीष्म क्यूब्स और चिकित्सा आपूर्ति सहित आवश्यक राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई जा रही है.
वायुसेना ने कहा कि भारतीय मिशन द्वारा आवश्यक आपूर्ति, सूखा राशन, कपड़े और ईंधन सहित राहत सहायता की एक खेप पूर्वी प्रांत के मुख्य सचिव और त्रिंकोमाली जिला प्रशासन को सौंप दिया गया.

वहीं, कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग यहां फंसे भारतीयों को निकालने में भी मदद कर रहा है. चक्रवात प्रभावित श्रीलंका में खराब मौसम के कारण कोलंबो हवाई अड्डे पर फंसे 320 से अधिक भारतीय नागरिकों को रविवार को वापस घर भेजा गया. भारतीय उच्चायोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘कोलंबो से दो आईएएफ विमान, एक (विमान) 247 यात्रियों के साथ तिरुवनंतपुरम के लिए और एक (विमान) 76 यात्रियों के साथ दिल्ली (हिंडन) के लिए उड़ान भरी.

उच्चायोग ने कहा कि वह (भारतीय उच्चायोग) फंसे हुए भारतीय यात्रियों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है और उनकी शीघ्र स्वदेश वापसी को लेकर सुविधा प्रदान कर रहा है. उच्चायोग ने कहा कि श्रीलंका के फंसे भारतीय यात्री आपातकालीन नंबर +94 773727832 पर संपर्क कर सकते हैं या कोलंबो स्थित भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अब कार्यशील एयरलाइन के काउंटर पर संपर्क कर सकता है.

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