Delhi Blast: डॉ. शाहीन के फ्लैट से मिले 18.5 लाख, सोने के बिस्किट और विदेशी करेंसी, लव अफेयर का भी हुआ खुलासा


फरीदाबाद: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कमांडर डॉ. शाहीन चार साल सऊदी अरब में भी रही है। साल 2014 से 2018 के दौरान उसने सऊदी अरब के मेडिकल कॉलेज में बतौर प्रोफेसर नौकरी की। साल 2018 में भारत लौटने के बाद 2021 तक तीन साल उसने कुछ नहीं किया। वो घर पर ही रहती थी।
तीन साल खाली रहकर फैलाया आतंकी नेटवर्क
फिर 2021 में उसने अल फलाह यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी हासिल कर ली। जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो सऊदी अरब से जब वो लौटी तो आतंकी संगठन के संपर्क में आ चुकी थी। इसी दौरान जब वो तीन साल खाली रही तो वो आतंकी गतिविधियों में लिप्त हो गई और अपना नेटवर्क फैलाने लगी। इस दौरान उसे टेरर फंडिंग के रुपये भी काफी मिले।
डॉ. मुजम्मिल और शाहीन आ गए थे बेहद करीब
साल 2021 में अल फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत होने के बाद उसने यहां व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के तहत अन्य डॉक्टरों से संपर्क बढ़ाया। इसमें वो डॉ. मुजम्मिल के बेहद करीब आ गई थी। दोनों के बीच नजदीकीयां काफी बढ़ गईं और प्यार और शादी तक ये रिश्ता पहुंच गया। इसके पीछे भी मकसद अपने नेटवर्क को बढ़ाना और अन्य लोगों को उसमें शामिल करना ही रहा।
डिजिटल लॉकर शाहीन ने खोला तो हैरान हो गई एनआईए टीम
मामले में अब तक की जांच जम्मू कश्मीर पुलिस, दिल्ली स्पेशल सेल की टीम ने की थी। इस दौरान दोनों ही टीमों ने अल फलाह यूनिवर्सिटी में डॉ. शाहीन के फ्लैट नंबर 32 के लॉकर आदि की जांच की। यहां पर टीम को एक डिजिटल लॉकर भी मिला था, जिसे टीम पहले खोल नहीं सकी थी। गुरुवार रात एनआईए की टीम डॉ. शाहीन को निशानदेही के लिए लेकर पहुंची तो टीम ने उससे ये डिजिटल लॉकर खुलवाया।
लॉकर से 18.5 लाख कैश, सोने के बिस्किट और गहने मिले
लॉकर खोला गया तो उसमें कई सारे पैकेट दिखे जिसमें खाकी रंग की टेप भी लगी थी। शाहीन से उनके बारे में पूछा तो बोली कि इन पैकेट में सामान है। पैकेट खोलकर चेक किया तो उसमें 500 के नोट भरे थे। सभी पैकेट खोलकर चेक किए तो इनमें 18.50 लाख रुपये नकद, सोने के दो बिस्किट, गहने मिले। सोने के बिस्किट व जूलरी का कुल वजन 300 ग्राम पाया गया। इसके साथ ही सऊदी अरब की करेंसी भी लॉकर से टीम को मिली।





