SIR की योजना जल्दबाजी में लागू की गई थी: तृणमूल कांग्रेस; भाजपा ने ईसी का विवेकाधार बताया

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने रविवार को कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पूरी प्रक्रिया को एक सप्ताह के लिए ब­ढ़ाने के निर्वाचन आयोग के फैसले से पार्टी के इस रुख की पुष्टि होती है कि इसकी (एसआईआर की) योजना ”ठीक से सोच-समझकर नहीं बनाई गई थी” और ”जल्दबाजी” में लागू की गई थी.

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई ने कहा कि यह निर्वाचन आयोग का विवेकाधिकार है. उसने कहा कि निर्वाचन आयोग एसआईआर को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें मतदाता सूची में प्रत्येक वास्तविक नागरिक के नाम को बरकरार रखा जाएगा और देश में अवैध रूप से रह रहे अनधिकृत व्यक्तियों के नाम हटा दिए जाएंगे.

इससे पहले, नयी दिल्ली में जारी एक बयान में निर्वाचन आयोग ने कहा कि गणना प्रपत्र का वितरण अब चार दिसंबर के बजाय 11 दिसंबर तक जारी रहेगा. उसने कहा कि मसौदा मतदाता सूची अब नौ दिसंबर की जगह 16 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी के स्थान पर 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी.

विपक्षी दलों के इस आरोप के बीच कि ”बेहद कम समयसीमा” लोगों और जमीनी स्तर के निर्वाचन अधिकारियों के लिए समस्या पैदा कर रही है, निर्वाचन आयोग ने नौ राज्यों और तीन केंद्र-शासित प्रदेशों में एसआईआर कार्यक्रम को एक सप्ताह के लिए ब­ढ़ा दिया है.
टीएमसी के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश मजूमदार ने संवाददाताओं से कहा कि निर्वाचन आयोग की घोषणा दर्शाती है कि कैसे पूरी प्रक्रिया बिना किसी उचित योजना के ”जल्दबाजी में” घोषित की गई, ”जिसका उद्देश्य सिर्फ केंद्र में सत्तारू­ढ़ भाजपा के हितों को पूरा करना है.” मजूमदार ने दावा किया कि पिछले एक महीने में पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े तनाव के कारण चार बीएलओ समेत कम से कम 40 लोगों की जान चली गई और इससे पता चलता है कि एसआईआर की घोषणा से पहले इसकी योजना ठीक से सोच-समझकर नहीं बनाई गई थी.

केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से निर्वाचन आयोग के विवेक पर निर्भर है, क्योंकि निर्वाचन आयोग ही कार्यक्रम के बारे में सबसे अच्छा फैसला कर सकता है. पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ”निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से लागू करना एक प्रक्रियात्मक कदम है. टीएमसी घुसपैठियों के वोट से जीतने के लिए एसआईआर को रोकना चाहती है. निर्वाचन आयोग के इस कदम के बाद टीएमसी की सारी कलई खुल चुकी है.” पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस ने सवाल उठाया कि एसआईआर प्रक्रिया को केवल सात दिनों के लिए क्यों ब­ढ़ाया गया और इस पर स्पष्टीकरण मांगा कि इसे एक महीने के लिए क्यों नहीं ब­ढ़ाया गया.

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार जल्दबाजी में काम कर रहे हैं. सरकार ने कहा, ”हम एसआईआर के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अगर यह भाजपा की मदद के लिए किया गया है, तो कांग्रेस निश्चित रूप से विरोध करेगी… केवल सात दिन क्यों? एक महीना क्यों नहीं? ज्ञानेश कुमार भाजपा की मदद के लिए एसआईआर में इतनी जल्दबाजी क्यों कर रहे हैं?” सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस आयोग की कार्यवाही में पारर्दिशता और निष्पक्षता चाहती है. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी कथित राजनीतिक पूर्वाग्रह का पार्टी कड़ा विरोध करेगी.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच एसआईआर प्रक्रिया को लेकर एक मौन सहमति बन गई है और राज्य की सत्तारू­ढ़ पार्टी द्वारा लगाए गए आरोप केवल उसका सार्वजनिक दिखावा हैं.

चक्रवर्ती ने कहा, ”क्या यह मजाक नहीं है कि एसआईआर को केवल एक हफ्ते के लिए ब­ढ़ाया गया है? न तो भाजपा और न ही तृणमूल कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया को रोकने के लिए गंभीर है. गरीब नागरिक इसका खामियाजा भुगत रहे हैं और मताधिकार से वंचित होने के डर में जी रहे हैं. निर्वाचन आयोग कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है.ह्व अधिकारियों ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के सभी चरणों की समय-सीमा ब­ढ़ाने का फैसला उन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ आंतरिक चर्चा के आधार पर लिया है, जहां यह प्रक्रिया जारी है.

इस बीच, बीएलओ अधिकार रक्षा समिति की एक सदस्य ने कहा कि सभी चरणों की समय-सीमा एक हफ्ते ब­ढ़ाने का आयोग का फ.ैसला ”मौजूदा हालात में अपर्याप्त और दिखावटी बदलाव” है. उन्होंने कहा, ”हमने सभी चरणों के लिए छह महीने या कम से कम तीन महीने का विस्तार मांगा था. आने वाले दिनों में जब तक निर्वाचन आयोग हमारी मांगें पूरी नहीं कर देता, हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.” समिति ने इस सप्ताह की शुरूआत में यहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सामने रात भर धरना दिया था.

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