‘युद्ध का निर्णय सेना प्रमुख नहीं ले सकते, वह फैसला राजनीतिक होता है’; राहुल गांधी का बयान

भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के विरोध में आज मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जवाहर चौक पर कांग्रेस ने ‘किसान महाचौपाल’ बुलाई है। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के जरिए देश के किसानों के हितों से समझौता किया। उन्होंने कहा कि यह डील चार महीने तक रुकी हुई थी और कृषि से जुड़े मुद्दों पर बातचीत ठप पड़ी थी। राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने इस दौरान संबंधित मंत्रियों से कोई चर्चा नहीं की और अचानक फैसला ले लिया।

‘किसानों को बेच दिया’ का आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि अमेरिका

की बड़ी कंपनियां सोया, कपास और मक्का जैसे कृषि उत्पाद भारत में बेचें, क्योंकि इससे भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता था। उनके अनुसार, चार महीने तक बातचीत रुकी रही, लेकिन उनके भाषण के बाद प्रधानमंत्री ने बिना कैबिनेट से चर्चा किए अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर समझौते के लिए सहमति दे दी। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों को कमजोर किया और उनका डेटा तक बाहर दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी प्रभावित हुई है।

‘युद्ध जैसे गंभीर विषय पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी निर्वाचित सरकार की’
राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरण पुस्तक को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि युद्ध में जाने का निर्णय सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक होता है। किसान चौपाल कार्यक्रम में बोलते हुए राहुल ने कहा कि सेना अपना कर्तव्य निभाती है, लेकिन युद्ध का अंतिम निर्णय राजनीतिक नेतृत्व द्वारा लिया जाता है। उन्होंने इस संदर्भ में पूर्व सेना प्रमुख की किताब में उठाए गए मुद्दों का उल्लेख किया। किसी भी देश में युद्ध जैसे गंभीर विषय पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी निर्वाचित सरकार और राजनीतिक नेतृत्व की होती है, जबकि सेना उस निर्णय को लागू करने का कार्य करती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
अमेरिका-बांग्लादेश और टेक्सटाइल पर सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि अब सरकार यह कह रही है कि बांग्लादेश की मदद की जाएगी और टेक्सटाइल सेक्टर में जीरो प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा। उनका दावा है कि यदि भारत अमेरिका से कपास खरीदेगा तो उस पर भी जीरो टैक्स लागू होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हर साल भारत को अमेरिका से भारी मात्रा में आयात करना पड़ेगा, तो इससे देश की घरेलू इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा।

‘दबाव में लिया गया फैसला’
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह निर्णय दबाव में लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने समझौते में सब कुछ दे दिया, लेकिन बदले में देश को क्या मिला, यह स्पष्ट नहीं है। उनके मुताबिक, पहले की तुलना में अब भारत को ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा और आयात की कोई ठोस गारंटी भी नहीं मिली है।

राजनीतिक छवि बचाने का आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि यह सब अपनी छवि और राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए किया गया है। लेकिन इससे न तो किसानों को फायदा होगा और न ही देश की इंडस्ट्री को। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के हितों से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ताओं के मन में भी यह बात है कि नरेंद्र मोदी पर दबाव है। उनकी आंखों में देखिए, आपको समझ आएगा कि उन्हें दो तरफ से घेरा गया है और वे फंसे हुए हैं।

ट्रंप टैरिफ और सुप्रीम कोर्ट का जिक्र
राहुल गांधी ने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसलों को रद्द करने का आदेश दिया और उन्हें वापस लिया गया। उन्होंने कहा कि अन्य देशों ने भी अपने फैसले बदले, लेकिन नरेंद्र मोदी की ओर से इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा गया। राहुल ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि अगर दम है तो अमेरिका के साथ हुई डील को रद्द करके दिखाएं।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आह्वान
राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे किसी से डरें नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश में इंडस्ट्री खड़ी की, जबकि मौजूदा सरकार उसे खत्म कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मजबूती से खड़े रहने और जनता तक सच्चाई पहुंचाने का आह्वान किया।



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