भारत को एशियन गेम्स से पहले कितने T20 खेलने हैं? गंभीर-श्रेयस ढाई महीने में कैसे दूर करेंगे खामियां

आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में 0-2 से हार के बाद भारतीय टीम फिलहाल इंग्लैंड पहुंच गई है, जहां उन्हें मेजबान के साथ पांच मैचों की टी20 सीरीज खेलनी है। टीम इंडिया का मकसद एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक का बचाव करना है, लेकिन अब तक टीम की तैयारियां कुछ खास नहीं दिखी हैं। सितंबर में जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स में भारत स्वर्ण पदक का प्रबल दावेदार होगा, लेकिन उससे पहले टीम के सामने अपनी कमजोरियों को दूर करने की बड़ी चुनौती है। मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर के पास लगभग ढाई महीने का समय है। इस दौरान भारत इंग्लैंड और जिम्बाब्वे के खिलाफ कुल आठ टी20 मुकाबले खेलेगा। यही मैच टीम के लिए अंतिम तैयारी और सही संयोजन तलाशने का सबसे बड़ा मौका होंगे।

आयरलैंड दौरे ने किन कमजोरियों की ओर इशारा किया?

सीरीज हार ने भारतीय टीम के कई सवाल सामने ला दिए। इनमें प्रमुख हैं-

1. पावरप्ले में धीमी बल्लेबाजी

भारत आयरलैंड के खिलाफ उछाल वाली पिचों पर शुरुआती छह ओवरों का पूरा फायदा नहीं उठा सका। खराब शुरुआत मिलने से मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव बन गया।

न तो संजू सैमसन का बल्ला कुछ खास बोला और न ही अभिषेक शर्मा उम्मीदों पर खरा उतरे।
भारत ने पहले मैच में 80 रन के अंदर चार विकेट गंवा दिए थे, तो दूसरे टी20 में 80 रन के अंदर पांच विकेट गिर चुके थे।
सैमसन ने पहले टी20 में पांच रन बनाए, जबकि दूसरे मैच में वह खाता तक नहीं खोल सके।
अभिषेक ने पहले टी20 में 49 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन वह दूसरी पारी में डक पर आउट हुए।
ईशान किशन दो मुकाबलों में कुल मिलाकर महज 13 रन ही बना सके।

2. फिनिशिंग की कमी

मध्य और निचले क्रम के बल्लेबाज अंतिम ओवरों में रन गति नहीं बढ़ा सके। मध्यक्रम में भी खास तौर पर तिलक ही अच्छे टच में दिखे, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट भी महज 119 का रहा।
इसके अलावा नए टी20 कप्तान श्रेयस और ऑलराउंडर्स खराब फॉर्म में नजर आए। आखिर के ओवरों में भारतीय टीम ज्यादा रन नहीं बटोर सकी और यही नुकसान कर गया।
भारतीय टीम का मध्यक्रम इस सीरीज में खोखला नजर आया। हार्दिक पांड्या की कमी टीम इंडिया को साफतौर पर खली। अय्यर, अक्षर पटेल, और शिवम दुबे बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके।

3. डेथ बॉलिंग चिंता का विषय

अंतिम चार-पांच ओवरों में भारतीय गेंदबाज लगातार रन लुटाते दिखे। आयरलैंड की टीम ने मैच के इसी फेज रुख बदला।
आयरलैंड ने पहले टी20 में आखिरी पांच ओवर में करीब 60 रन बटोरे, वहीं दूसरे टी20 में धीमी बल्लेबाजी के बावजूद 40 रन बटोरे और 150 के पार स्कोर ले गए।

4. गड़बड़ नजर आया टीम कॉम्बिनेशन

भारत का दोनों ही टी20 मुकाबले में टीम कॉम्बिनेशन गड़बड़ नजर आया। आयरलैंड की पिच पर पहले टी20 में वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल के रूप में दो स्पिनर्स के साथ उतरने का फैसला टीम के खिलाफ गया।
सुंदर से पहले टी20 में सिर्फ एक ओवर करवाया गया, जिसमें उन्होंने 19 रन दिए। वहीं, पहले टी20 में प्रसिद्ध कृष्णा को खिलाने का निर्णय भी सवालों के घेरे में रहा। कृष्णा ने चार ओवर के स्पेल में बिना कोई विकेट लिए 57 रन दिए।

5. उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे कप्तान अय्यर

हालिया फॉर्म को देखते हुए श्रेयस अय्यर से आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में दमदार प्रदर्शन की उम्मीद थी।
हालांकि, बतौर कप्तान पहली टी20 सीरीज में अय्यर का बल्ला पूरी तरह से खामोश रहा। अय्यर दो मुकाबलों में महज 13 रन ही बना सके।
टॉप ऑर्डर के फेल होने के बाद अय्यर की नाकामी भारतीय टीम को काफी भारी पड़ी।

6. तेज गेंदबाजी भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी

तेज गेंदबाजी विभाग भी लगातार चर्चा में रहा। प्रसिद्ध कृष्णा से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वह दोनों मैचों में अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके।
कई क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें अपनी गेंदबाजी में अधिक विविधता, खासकर यॉर्कर और डेथ ओवरों की योजनाओं पर काम करने की जरूरत है।
वहीं, प्रिंस यादव ने दूसरे टी20 में तीन विकेट लेकर सकारात्मक संकेत जरूर दिए और भविष्य के विकल्प के रूप में अपनी दावेदारी मजबूत की।

अब एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम देख लेते हैं

एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में मौजूदा टीम से ज्यादा बदलाव नहीं हैं। सिर्फ जसप्रीत बुमराह को टीम से जोड़ा गया है। इससे भारत की गेंदबाजी जरूर मजबूत होगी, लेकिन बल्लेबाजी की समस्या कैसे दूर होगी। बुमराह रन रोक सकते हैं, लेकिन रन बल्लेबाजों को ही बनाने हैं और कोई भी अच्छे टच में नहीं दिखा है। जापान में पिच कैसी होगी, यह भी किसी को अंदाजा नहीं है। अगर टीम बाउंस और तेज पिच पर इसी तरह चूकते रहे तो पाकिस्तान या अफगानिस्तान के तेज गेंदबाज भी इसका फायदा उठा सकते हैं। ऐसे में टीम को अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देना होगा। आगामी दो टी20 सीरीज भारतीय टीम के लिए प्रयोग करने का सबसे अच्छा मौका होंगी।

एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह।

एशियन गेम्स से पहले भारत खेलेगा कुल आठ टी20

आयरलैंड दौरे के बाद भारत के पास दो और टी20 सीरीज हैं।

इंग्लैंड के खिलाफ पांच टी20
जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन टी20

एशियन गेम्स से पहले भारत का पूरा टी20 शेड्यूल

तारीख मुकाबला स्थान समय (भारतीय समय)
1 जुलाई इंग्लैंड vs भारत (पहला टी20) चेस्टर-ले-स्ट्रीट रात 10:00 बजे
4 जुलाई इंग्लैंड vs भारत (दूसरा टी20) मैनचेस्टर शाम 7:00 बजे
7 जुलाई इंग्लैंड vs भारत (तीसरा टी20) नॉटिंघम रात 10:00 बजे
9 जुलाई इंग्लैंड vs भारत (चौथा टी20) ब्रिस्टल रात 10:00 बजे
11 जुलाई इंग्लैंड vs भारत (पांचवां टी20) साउथैम्प्टन शाम 7:00 बजे
23 जुलाई जिम्बाब्वे vs भारत (पहला टी20) हरारे शाम 4:30 बजे
25 जुलाई जिम्बाब्वे vs भारत (दूसरा टी20) हरारे शाम 4:30 बजे
26 जुलाई जिम्बाब्वे vs भारत (तीसरा टी20) हरारे शाम 4:30 बजे

गंभीर और श्रेयस इन कमियों को कैसे दूर कर सकते हैं?

पावरप्ले में अधिक आक्रामक बल्लेबाजी रणनीति अपनाई जा सकती है।
अगर सैमसन-अभिषेक रन नहीं बना पा रहे तो वैभव सूर्यवंशी को मौका दिया जा सकता है।
एक दो मैच में उन्हें खिलाकर टेस्ट किया जा सकता है। वह बड़े मैच के खिलाड़ी माने जाते हैं।
इतना ही नहीं, पाकिस्तान और अन्य टीमों के पास अभी तक वैभव को लेकर कोई खास प्लान नहीं होगा।
बुमराह के आने से डेथ बॉलिंग अच्छी होगी, लेकिन सवाल बीच के ओवरों में विकेट निकालने का है, जिसमें सुंदर और अक्षर को खास सफलता नहीं मिली।
प्रसिद्ध ने भी काफी रन दिए। ऐसे में दारोमदार हर्षित, अर्शदीप और बुमराह पर ही होगा।
भारत को ऑलराउंडर्स की जगह विशेषज्ञ स्पिनर को खिलाने पर ध्यान देना होगा। वरुण चक्रवर्ती या रवि बिश्नोई को मौका देना होगा।
मध्यक्रम में ज्यादा हेरफेर किए बिना एक ही टीम को अब से लेकर एशियन गेम्स तक लगातार मौके देने होंगे, ताकि उन्हें मैच प्रैक्टिस मिल सके।
खिलाड़ियों की फील्डिंग और कैचिंग पर विशेष अभ्यास कराया जाएगा। पिछले कुछ समय से ये टीम इंडिया की सबसे बड़ी समस्या रही है।

मुख्य कोच गौतम गंभीर पहले भी आक्रामक क्रिकेट की वकालत कर चुके हैं। ऐसे में उम्मीद है कि टीम इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपनी रणनीतियों की वास्तविक परीक्षा लेगी।



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