शबरिमला सोना चोरी मामले की सतर्कता जांच के अदालती आदेश के बाद माकपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा


मलप्पुरम: केरल के शबरिमला में भगवान अयप्पा मंदिर में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने विपक्षी दल कांग्रेस पर मंगलवार को तीखा हमला किया और इस मामले में पार्टी के प्रमुख नेताओं की स्पष्ट भूमिका होने का आरोप लगाया।
माकपा के प्रदेश सचिव एमवी गोंिवदन ने मलप्पुरम में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मीडिया का एक वर्ग, जिसने पहले वामपंथियों को बचाव की मुद्रा में लाने की कोशिश में सोना चोरी मामले पर बढ़-चढकर खबरें प्रसारित की थीं, अब उसने कांग्रेस नेताओं की भूमिका की ओर इशारा करने वाले तथ्य सामने आने के बाद चुप्पी साध ली है।
गोंिवदन की ये टिप्पणियां केरल उच्च न्यायालय के साल 2017 में शबरिमला मंदिर में नये ध्वज स्तंभ की स्थापना के सिलसिले में सोने और धन की कथित चोरी की सतर्कता जांच के आदेश दिए जाने के एक दिन बाद आई हैं। माकपा नेता ने कहा कि पिछले दिनों सामने आई कथित अनियमितताएं उस समय हुई थीं, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रयार गोपालकृष्णन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष थे, जब पार्टी नेता अजय थरायिल टीडीबी के सदस्य के रूप में कार्यरत थे।
उन्होंने कहा, “उच्च न्यायालय के ताजा आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने नये ध्वज स्तंभ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।” गोंिवदन ने आरोप लगाया कि नये ध्वज स्तंभ के लिए कई श्रद्धालुओं की ओर से दान किया गया सोना गायब है और इसके (नये ध्वज स्तंभ) नाम पर करोड़ों रुपये भी एकत्र किए गए थे।
उन्होंने दावा किया, “यह भी कहा जाता है कि इनमें से किसी का भी उचित हिसाब-किताब नहीं रखा गया और न ही कोई रसीद जारी की गई।” गोंिवदन ने सवाल किया कि शबरिमला में नये ध्वज स्तंभ के नाम पर जुटाए गए सोने और धन का क्या हुआ। उन्होंने अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाने की मांग की।
माकपा नेता ने राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन से शबरिमला सोना चोरी मामले के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के बीच मुलाकात की परिस्थितियों के बारे में स्पष्टीकरण देने की भी मांग की। एक सवाल के जवाब में गोंिवदन ने सतीशन पर केरल में भाजपा-मुस्लिम लीग-कांग्रेस-जमात-ए-इस्लामी गठजोड़ के “समन्वयक” के रूप में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से जमात-ए-इस्लामी के साथ पार्टी के संबंधों पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।






