तृणमूल कांग्रेस में संकट: ‘वो अहंकारी है, उसके कारण पार्टी खत्म हो गई’, अभिषेक पर क्यों बिफरे कल्याण बनर्जी?


कोलकाता: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस घास के तिनके की तरह बिखरती दिख रही है। इसकी शुरुआत पहले विधानसभा के स्तर पर शुरू हुई, जो राज्यसभा तक जा पहुंची। पिछले तीन दिन में पार्टी के तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है। अब टीएमसी के बड़े नेता कल्याण बनर्जी के आरोपों ने पार्टी को अंदर तक झकझोर दिया है। दरअसल, कल्याण बनर्जी हस्ताक्षर जालसाजी के मामले में अभिषेक बनर्जी के वकील के तौर पर कोर्ट की सुनवाई में शामिल हो रहे हैं। लेकिन, इस सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के न मौजूद रहने पर उन्होंने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से साफ कहा है कि उनमें और अभिषेक बनर्जी में से एक को चुनें।
केस मैंने ही फाइल किया था- कल्याण बनर्जी
इस मामले पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘सीआईडी से जुड़ा यह मामला असल में पहले ही फाइल किया गया था। उन्होंने इसे पहले फाइल किया था। शुक्रवार को वेकेशन बेंच बैठी थी और मैंने पूरे दिन इंतजार किया, लेकिन मामले पर सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद, मैंने कोर्ट के सामने इसका जिक्र किया और जज ने कहा कि मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। जैसा कि आप जानते हैं, मंगलवार को कैमक स्ट्रीट स्थित उनके (अभिषेक बनर्जी) घर और दीदी के ऑफिस में तलाशी ली गई थी। मैं दिल्ली से आया था और वहां भी गया था। तलाशी के दौरान मैं मौजूद था। फिर कल सुबह, मैंने जस्टिस कौशिक चंदा के सामने मामले का जिक्र किया और कहा कि यह जरूरी है।
मैंने उनसे कहा कि तलाशी गैर-कानूनी थी। तलाशी पहले ही हो चुकी थी और कभी भी कुछ भी हो सकता था, इसलिए मामले पर सुनवाई जरूरी थी। जज ने मुझसे कहा कि मामले की सुनवाई उसी दिन होगी। उसके बाद, दोपहर करीब 12.30 बजे एक वकील आया और मुझे बताया कि तलाशी के संबंध में एक अलग रिट याचिका दायर की गई है और एक सीनियर वकील इसे देखेंगे। मैंने पूछा, ‘अगर आपने यह मामला पहले ही दायर कर दिया था, तो आपने हमसे इस पर चर्चा क्यों नहीं की? यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है’।






