पश्चिम एशिया तनाव से एशियाई बाजारों में भारी गिरावट, कच्चा तेल 109 डॉलर के पार

नई दिल्ली: ईरान युद्ध को समाप्त करने की कूटनीतिक वार्ताओं में आई रुकावट का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से तेज उछाल आया है, जिसके कारण मंगलवार को प्रमुख एशियाई शेयर बाजारों में सुस्ती और गिरावट का रुख देखने को मिला। यह स्थिति उन देशों के लिए विशेष चिंता का विषय है जो ऊर्जा के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।

कच्चे तेल में उबाल और सप्लाई चेन की चिंता
युद्ध विराम की अस्थिर स्थिति के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है, जो एशिया (विशेषकर जापान) में तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। आपूर्ति बाधित होने की इन चिंताओं ने ऊर्जा बाजार को फिर से गरमा दिया है।

आंकड़ों के अनुसार, जून डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड का भाव 1.11 डॉलर बढ़कर 109.34 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इसी तरह जुलाई अनुबंध वाला ब्रेंट क्रूड भी 1.08 डॉलर की बढ़त के साथ 102.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। गौर करने वाली बात यह है कि युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो संघर्ष के दौरान 120 डॉलर तक भी जा चुका है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड 96 सेंट चढ़कर 97.33 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।

एशियाई बाजारों का हाल और बैंक ऑफ जापान का रुख

महंगे तेल के इस दबाव के कारण एशियाई शेयर बाजारों में व्यापक रूप से नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है:
जापान: ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,884.12 पर आ गया।
अन्य एशियाई बाजार: हांगकांग का हैंग सेंग 0.7 प्रतिशत गिरकर 25,751.04 पर और शंघाई कंपोजिट 0.2 प्रतिशत टूटकर 4,078.77 पर बंद हुआ। ऑस्ट्रेलिया के S&P/ASX 200 में भी 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 6,683.10 पर पहुंच गया।

इस उथल-पुथल के बीच, ‘बैंक ऑफ जापान’ (बीओजे) के मौद्रिक नीति बोर्ड ने 6-3 के बहुमत से मतदान करते हुए अपनी प्रमुख ब्याज दर को 0.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। BOJ ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि अर्थव्यवस्था अभी भी मध्यम गति से बढ़ रही है, लेकिन महंगे कच्चे तेल के कारण विकास दर धीमी होने की आशंका है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व के हालात और भविष्य के जोखिमों पर पैनी नजर रखना आवश्यक है।

वॉल स्ट्रीट का प्रदर्शन और बॉन्ड मार्केट
अमेरिकी बाजारों (वॉल स्ट्रीट) में मिलाजुला रुख देखा गया। मजबूत कॉर्पोरेट मुनाफे की उम्मीदों के बीच S&P 500 सूचकांक 0.1 प्रतिशत चढ़कर 7,137.91 के अपने नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.1 प्रतिशत गिरकर 49,167.79 पर रहा, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 0.2 प्रतिशत की मामूली तेजी देखी गई। दूसरी ओर, बॉन्ड बाजार में कच्चे तेल की तेजी का असर दिखा और 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड शुक्रवार के 4.31 प्रतिशत से बढ़कर 4.33 प्रतिशत हो गई।

आगे का आउटलुक
वैश्विक निवेशकों की नजर अब पूरी तरह से इस सप्ताह होने वाली प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर टिकी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) इस सप्ताह अपनी ब्याज दरों पर निर्णय की घोषणा करने वाले हैं। इसके अलावा, बाजार की दिशा तय करने में अल्फाबेट, अमेज़न, मेटा प्लेटफॉर्म्स, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी बड़ी टेक कंपनियों की आगामी अर्निंग्स (वित्तीय नतीजे) रिपोर्ट भी अहम भूमिका निभाएंगी। जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और ऊर्जा बाजार में स्थिरता नहीं आती, शेयर बाजारों में अस्थिरता का यह दौर जारी रहने की संभावना है।



Show More

akhbarilal

Akhbaarilal is daily hindi news portal of Chhattisgarh. Get breaking and latest news from Indian including all states. Find latest news from Raipur. Read CG DPR News on www.akhbaarilal.in.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button