मोदी सरकार की नीतियों से रुपया कमजोर हुआ, आर्थिक हालात अच्छे नहीं: खरगे

नयी दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट आई है तथा इससे यह भी पता चलता है कि देश की आर्थिक परिस्थित अच्छी नहीं है. खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को जवाब देना होगा कि रुपया क्यों कमजोर होता जा रहा है.
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, डॉलर के मुकाबले 90.36 पर खुला. शुरुआती कारोबार में यह 28 पैसे और टूटकर अबतक के सबसे निचले स्तर 90.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. बुधवार को रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 90 का स्तर पार कर 90.15 के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था.
खरगे ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ”मोदी सरकार की नीतियों की वजह से रुपया कमज.ोर हो रहा है. अगर सरकार की नीति अच्छी होती, तो रुपये की कीमत बढ़ती. रुपये के कमजोर होने से पता चलता है कि हमारी आर्थिक हालत अच्छी नहीं है. सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपा ले लेकिन दुनिया में हमारी करेंसी की कोई ‘वैल्यू’ नहीं है.” बाद में उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”रुपया आज 90 पार कर चुका है. सरकार चाहे कोई भी ढिं.ढ़ोरा पीटे, रुपये की क.ीमत गिरने से ये पता चलता है की देश की असली आर्थिक परिस्थिति क्या है. अगर मोदी सरकार की नीति ठीक होती तो रुपया नहीं गिरता.”
खरगे के मुताबिक, ”वर्ष 2014 के पहले मोदी जी ने कहा कि क्या कारण है हिंदुस्तान का रुपया पतला होता जा रहा है, ये जवाब देना पड़ेगा आपको. देश आप से जवाब मांग रहा है.” उन्होंने कहा, ” मोदी जी से आज हम यही सवाल पूछ रहें हैं. उनको जवाब तो देना पड़ेगा.” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने रुपये की कीमत में गिरावट पर संवाददाताओं से कहा, ”मनमोहन सिंह जी के वक्त भाजपा के लोग रुपये को लेकर क्या-क्या कहते थे, आज रुपए के हाल पर ये क्या जवाब देंगे?
रुपये के मूल्य में गिरावट से आम लोगों के लिए आर्थिक समस्या बढ़ रही: कांग्रेस सांसद तन्खा
राज्यसभा में कांग्रेस सदस्य विवेक के तन्खा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई तीव्र गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि घरेलू मुद्रा के कमजोर होने से आम लोगों की आर्थिक तकलीफ बढ़ी है. शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया बृहस्पतिवार को अबतक के सबसे निचले स्तर 90.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया और यह भारतीय इतिहास का रुपये का ‘सबसे कमजोर’ स्तर है.
उन्होंने कहा, ”मैं एक अत्यंत सामयिक विषय पर बोल रहा हूं. भारतीय रुपये की लगातार गिरावट आम भारतीय की बढ़ती आर्थिक समस्याङ्घ की वजह है. रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले अबतक के सबसे निचले स्तर 90.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. यह चिंताजनक है.” कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में रुपये ने अपनी 20 से 27 प्रतिशत तक मूल्य गंवाया है, जिसका अर्थ है कि लोगों की जेब में मौजूद रकम अब वैश्विक स्तर पर लगभग एक चौथाई कम क्रय शक्ति रखती है.
तन्खा के अनुसार, इस वर्ष अकेले रुपये में पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो 2022 के बाद सबसे तेज है. इससे 2025 में यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है. कांग्रेस सांसद ने कहा कि भारत ने एक ही महीने में 40 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार घाटा दर्ज किया है, जो दर्शाता है कि आयात, निर्यात पर कितना भारी पड़ रहा है.
उन्होंने दावा किया कि इसके साथ ही विदेशी निवेशकों ने इस वर्ष भारतीय बाजार से 17 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है. यह कई साल की सबसे बड़ी निकासी है. इससे पूंजी उपलब्धता पर असर पड़ा है. तन्खा ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह स्थिर बना हुआ है और बा’ उधारी भी धीमी है. यह इस बात का संकेत है कि दुनिया भारत की बाहरी स्थिरता को लेकर अधिक सतर्क हो रही है.
उन्होंने कहा कि कमजोर रुपये से आयात की लागत बढ़ती है, जिससे महंगाई बढ़ती है और इसका सबसे अधिक असर गरीब, मध्यम वर्ग और सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन, लैपटॉप और चिकित्सा उपकरणों सहित सभी वस्तुएं महंगी हो जाती हैं क्योंकि अधिकांश उत्पादों के कलपुर्जे भारत आयात करता है. ”साथ ही, निर्यातकों को भी अधिक लाभ नहीं होता क्योंकि कई निर्यात क्षेत्र…जैसे वस्त्र, रसायन और इंजीनियरिंग…आयातित वस्तुओं पर निर्भर हैं.” कांग्रेस सांसद ने कहा, ”आम आदमी के लिए रुपये के मूल्य में गिरावट ऐसी है जैसे नियोक्ता के बताए बिना वेतन में कटौती हो गई हो.”




