सिंगरौली में ‘अंगूठा चोरी’ के जरिये खनन की अनुमति ली गई, सीबीआई जांच हो: कांग्रेस

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली स्थित धिरौली कोयला ब्लॉक में ”फर्जी ग्राम सभाओं और मृत लोगों के अंगूठों के निशान का इस्तेमाल कर” खनन की अनुमति हासिल की गई। मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि यह वन अधिकार कानून और पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी पेसा कानून का उल्लंघन है तथा इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए, इसमें शामिल कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा दावों का सत्यापन होने तक खनन पर रोक लगाई जाए।

यह परियोजना अदाणी समूह से संबंधित है। कांग्रेस के आरोपों पर इस समूह या स्थानीय प्रशासन की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. राजू और पार्टी के प्रकोष्ठ आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने यहां संवाददाता सम्मेलन में सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए यह दावा किया कि ंिसगरौली में खनन की अनुमति के लिए उन ग्रामवासियों के अंगूठे के निशान का इस्तेमाल किया गया जिनकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है।

उन्होंने इसे ”अंगूठा चोरी” करार दिया। राजू का कहना था कि पिछले 12 वर्षों में विकास के नाम पर आदिवासियों के खिलाफ अन्याय हुआ है और उनकी संवैधानिक सुरक्षा को कमजोर किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करता है तो सरकार पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर उनकी आवाज दबाने का काम करती है।

उनका कहना था कि भाजपा सरकार आदिवासियों के बजाय अपने कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम की धारा 3 आदिवासी समुदायों को सामुदायिक वन संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार देती है लेकिन इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण जारी है और लोगों को उचित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के बिना विस्थापित किया जा रहा है।

भूरिया ने आरोप लगाया, ”भाजपा सरकार में हर तरह की धोखाधड़ी संभव है। देश में वोट चोरी, सीट चोरी और चंदा चोरी के बाद अब “अंगूठा चोरी” का मामला सामने आया है।” उन्होंने खनन के इस पूरे मामले को ”ंिसगरौली फाइल्स” की संज्ञा दी और दावा किया कि इस मामले में धिरौली कोयला ब्लॉक में खनन कर रही अदाणी समूह से जुड़ी एक कंपनी के लिए ग्राम सभाओं की मंजूरी लेने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।”

भूरिया ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं की अनुमति अनिवार्य होने के बावजूद ”फर्जी ग्राम सभाएं आयोजित कर फर्जी अंगूठों” के जरिये मंजूरी हासिल की गई। उन्होंने कुछ आरटीआई दस्तावेज और कुछ लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाते हुए दावा किया, ”वर्ष 2014 में दिवंगत हो चुके बृजभान ंिसह से वर्ष 2021 में अनुमति ली गई। इसी तरह फुलेश्वरी ंिसह का निधन वर्ष 2018, जग बंधन ंिसह गोंड का निधन वर्ष 2015 और चांद ंिसह का निधन वर्ष 2017 में हुआ था, लेकिन उनके अंगूठों के निशान भी वर्ष 2021 के ग्राम सभा प्रस्तावों में दर्ज किए गए।”

भूरिया ने मांग की कि ”अंगूठा चोरी” और फर्जी ग्राम सभाओं से जुड़े पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए, कथित रूप से शामिल कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा दावों का सत्यापन पूरा होने तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कथित रूप से मताधिकार छीनने के मामलों की भी जांच कराने की मांग की।



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